नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र की चार धाम परियोजना के हिस्से के रूप में ऑल वेदर रोड को चौड़ा करने का रास्ता साफ कर दिया। सरकार की तरफ दिए गए इस तर्क से कोर्ट सहमत हुआ कि क्षेत्र में व्यापक सड़कें रणनीतिक महत्व के लिए जरूरी हैं। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि रक्षा मंत्रालय एक विशेष निकाय है और इसकी संचालन आवश्यकताओं को तय कर सकता है। अदालत ने कहा, ”सैनिकों और उपकरणों की आवाजाही की जरूरत है। हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हुई हैं।” अदालत ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों के बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करना होगा और रणनीतिक महत्व के राजमार्गों के साथ अन्य पहाड़ी इलाकों की तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता है।

हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता की पर्यावरण संबंधी चिंताओं को भी स्वीकार किया और कहा कि वह शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन कर रही है। यह समिति परियोजना की प्रगति पर हर चार महीने में सर्वोच्च न्यायालय को रिपोर्ट करेगी। इसमें राष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान और केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि भी होंगे। इसका उद्देश्य मौजूदा सिफारिशों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने कहा कि सरकार का यह फैसला देश की रक्षा ज़रूरतों के मुताबिक है। सुनवाई में केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि सीमा के दूसरी तरफ चीन ने चौड़ी सड़कें बना रखी हैं। युद्ध की स्थिति में सेना और मिसाइल को जल्द पहुंचाने के लिए चौड़ी सड़क की ज़रूरत है।
क्या था विवाद:
केंद्र सरकार की ऑल वेदर रोड के तहत केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे उत्तराखंड के चार धाम को आपस में हाइवे के जरिए जोड़ने की योजना है। इसी बीच 24 अगस्त को ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाइवे पर लैंडस्लाइड हो गया। प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे तीन मज़दूरों की इस हादसे में मौत हो गई। स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) ने करीब पांच घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया, तब जाकर शवों को ढूंढा जा सका।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट के काम के तहत चट्टानों की ढलानें काटने का काम चल रहा है। ये स्लोप कटिंग वर्क लैंडस्लाइड का कारण बन रहा है। बारिश के बीच कायदे से से काम रोक देना चाहिए, लेकिन चल रहा है, क्योंकि ऑल वेदर रोड को जल्द से जल्द पूरा करना है।
पर्यावरण से जुड़े अध्ययन करने वाले हेमंत जुयाल ने ‘दी टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा था कि जिन जगहों से सड़क गुजर रही है, वे काफी संवेदनशील हैं. यहां पर हिमालय काफी कमजोर है। ऐसे में सड़क चौड़ी करना घातक है। सड़क की चौड़ाई के मसले पर कमेटी दो गुटों में बंट गई। कमेटी के मुखिया रवि चोपड़ा और उनके तीन साथियों ने सड़क की 12 मीटर चौड़ाई पर सवाल उठाए। वहीं 21 लोगों ने इसे सही बताया।