देहरादून: पुलिस विभाग ने अपने कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देने की पहल की है। पुलिस महानिरीक्षक पुष्पक ज्योति ने एक आदेश जारी किया है कि अगर भविष्य में किसी उत्तराखंड पुलिस के कार्मिक की आकस्मिक मृत्यु होती है तो उनके पार्थिव शरीर को परिवारजनों तक ले जाने के लिए राजकीय वाहन और ताबूत का इस्तेमाल किया जाएगा।
बता दें कि गरुड़ के कोठूं गांव निवासी गणेश नाथ (34) पुलिस में थे और उनकी नैनीताल जिले में नियुक्ति थी। पुलिस प्रशासन ने 13 मार्च को उनकी हरिद्वार में कुंभ ड्यूटी लगाई थी। 28 मार्च को हरिद्वार में एक होटल के बाहर उनकी कार में उनका शव बरामद हुआ। 30 मार्च को उत्तराखंड पुलिस मृतक जवान गणेश के शव को ताबूत के बजाय बिस्तरबंद में लेकर उसके पैत्रिक गांव कोठूं पहुंची। शव सड़ी गली अवस्था में होने के कारण जवान की पत्नी, बच्चे गणेश के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए थे । वहीं लोगों ने पार्थिव देह को बिस्तर बंद में लाए जाने पर उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे ।

इस घटना को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक पुष्पक ज्योति आदेश जारी कर कहा कि भविष्य में पुलिस कार्मिक की आकस्मिक मृत्यु होती तो पार्थिव शरीर को परिवारजनों तक सम्मान सहित ले जाने के लिए राजकीय वाहन और ताबूत का इस्तेमाल किया जाएगा। जनपद प्रभारी अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित रहेंगे। किसी विशेष मुठभेड़, आतंकवादी घटनाओं, भीड़ नियंत्रण में शहीद हुए कार्मिक की सलामी के दौरान संबधित परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक/ उप महानिरीक्षक मौजूद रहेंगे। ताबूत पर होने वाले व्यय का भुगतान कल्याण निधि से वहन किया जाएगा। पार्थिव शरीर को दूर ले जाना हो और किसी प्रकार की क्षति से बचाने के लिए संलेपन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।