देहरादून: उत्तराखण्ड के पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट साझा करते हुए जानकारी दी कि, उन्होंने देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में दवाइयां और इंजेक्शन रखने के लिए फ्रीज तक मौजूद नहीं था, ऐसे में उन्होंने तत्काल अपने घर से एक फ्रीज अस्पताल में भिजवाया।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई उनके इस महान कार्य के बाद कई सवाल उठने लाजमी हैं। क्या व्यवस्थाएं इतनी लचर हैं कि, करोड़ो का बजट फूंकने के बाद भी दवाइयों और इंजेक्शन के लिए एक फ्रीज तक मौजूद नहीं है। यदि फ्रीज मौजूद नही था तो अब तक कैसे इंजेक्शन रखे जा रहे थे ? वहीं जब दूसरी तरफ त्रिवेंद्र सरकार में करोड़ो रूपये की लग्जरी गाड़ियां स्वास्थ्य महकमें ने खरीदी तो फ्रीज क्यों नही खरीद पाए। त्रिवेंद्र रावत जी ने फ्रीज भेंट किया अच्छा किया पर इससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल भी खुल गयी। जब देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल के ये हाल हैं तो अन्य जगह क्या हाल होंगे ?
त्रिवेंद्र रावत खुद मुख्यमंत्री रहते हुए जब अस्पताल में फ्रीज जैसी महत्वपूर्ण चीज नही जुटा पाए तो ये बड़ा सवाल है। वहीं उनके फ्रीज भेंट करने को लेकर सवाल वर्तमान मुख्यमंत्री पर भी उठने लाजमी हैं। जब पूर्व सीएम पहुंचे तो उनको ही क्यों अधिकारियों ने बताया कि फ्रीज की आवश्यकता है। इन अधिकारियों ने इसकी डिमांड आगे क्यों नही भेजी। या यूं कहें कि, ये एक तरह का पब्लिसिटी स्टंट था। जोकि खुद त्रिवेंद्र रावत के ऊपर भारी पड़ गया। लोग कई सवाल त्रिवेंद्र रावत पर ही खड़े कर रहे हैं कि, आखिर उन्होंने फ्रीज के बारे में पोस्ट क्यों की ? इससे उन्होंने सिस्टम की खुद ही पोल खोल कर रख दी।

इस घटना को लेकर एक तरफ जहां लोग त्रिवेंद्र से तरह तरह के सवाल सोशल मीडिया के माध्यम से पुछ रहे हैं वहीं विपक्ष भी हमलावर है , लोग सोशल मीडिया के माध्यम से ये भी पुछ रहे हैं की क्या 4 साल आपके राज में अस्पतालों को करोड़ो का बजट पास होने के बाद 8-10 हजार के फ्रिज भी नही मुहैय्या हो पाए? क्या आपने जो अपने घर का फ्रिज दान करके फ़ोटो डाला है जिस फ्रिज की 1 टांग टूटी हुई है वाकई आप उसे घर मे इस्तेमाल करते थे या फालतू पड़ा था इसलिये अस्पताल को दे दिया? कुछ भी कहो एक तरफ जहां त्रिवेन्द्र ने सत्ता मे विपक्षी दलों को आरोपों की झड़ी लगाने का मौका दिया है वहीं दूसरी तरफ त्रिवेन्द्र के कार्यकाल के वक़्त काम काज पर भी सवाल उठने लगे हैं ।
निर्भीक नज़र के लिए तारिक अंसारी की रिपोर्ट