देहरादून: नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के रैकेट में शामिल आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कई जानों को खतरे में डालकर करोड़ों कमाने वाले इन धंधेबाजों से सिर्फ 68 हजार रुपये खर्च कर 5 करोड़ रुपये कमा डाले। यूपी के बाद अब उत्तराखंड धंधेबाजों के निशाने पर था। आरोपियों ने नकली रेमडेसिविर की सप्लाई दिल्ली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में की। अब वह हरिद्वार और देहरादून में इंजेक्शन सप्लाई करने की तैयारी थे। लेकिन इससे पहले पकड़े गए। संदेह है कि इन्होंने कहीं ये इंजेक्शन हरिद्वार में भी तो नहीं बेचे। हालांकि, पुलिस और ड्रग्स विभाग ने इससे इनकार किया है

हरिद्वार में बने थे रैपर
जिन रैपरों को टैक्सीम इंजेक्शन में लगाकर रेमडेसिविर बनाकर बेचा गया था, वह हरिद्वार में ही छपे थे। रैपर किसने छापे, इसकी जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने हरिद्वार से गिरफ्तार किए गए आरोपी वतन कुमार सैनी की पत्नी से भी इस मामले में पूछताछ की है। दवा बनाने वाले कई और कंपनियां पुलिस की रडार में आ गई हैं। बताया जा रहा है कि कई कंपनियों में जाकर देखा भी गया था कि किस तरह की दवाई बन रही है। क्राइम ब्रांच की छापेमारी के बाद कई कंपनियों में छानबीन जारी है।

आरोपियों ने पहले एंटीबायोटिक टैक्सीम इंजेक्शन की 2000 डोज 34 रुपए प्रति इंजेक्शन के हिसाब से बाजार से 68 हजार में खरीदीं। इसके बाद इसमें रेमडेसिविर का रैपर लगाकर 25 हजार रुपए प्रति इंजेक्शन बेचकर 5 करोड़ से अधिक रुपये कमा लिए।
अनीता भारती, ड्रग इंस्पेक्टर ,हरिद्वार
रुड़की और हरिद्वार में नकली रेमडिसिविर के इंजेक्शनों में लेबल लगाने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड की एसटीएएफ ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि, दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र से जुड़े होने के कारण दवाओं की बारीक जानकारी रखते थे। रुपये कमाने के लालच में एंटीबायोटिक इंजेक्शन पर रेमडेसिविर दवा का लेबल चस्पा कर बेच रहे थे। एसटीएफ ने मामले में रुड़की, हरिद्वार, कोटद्वार में छापेमारी कर अहम जानकारी जुटाई है।