नई दिल्ली: एम्स के निदेशक डा रणदीप गुलेरिया ने कोविड-19 के हल्के संक्रमण के मामलों में सीटी स्कैन कराए जाने को लेकर सोमवार को जनता को आगाह किया और कहा कि इसके दुष्प्रभाव होते हैं, ऐसे में इसके फायदे से अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हल्के संक्रमण के मामलों में सीटी स्कैन नहीं कराने पर जोर देते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि कई लोग कोरोना वायरस संक्रमित पाए जाने के बाद सीटी स्कैन करा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आगाह कियाकि बिना जरूरत के सीटी स्कैन कराए जाने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

डा गुलेरिया ने कहा, ” एक सीटी स्कैन 300 से 400 छाती एक्स-रे के समान है। आंकड़ों के मुताबिक, युवा अवस्था में बार-बार सीटी स्कैन कराने से बाद में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। खुद को बार-बार रेडिएशन के संपर्क में लाने से नुकसान हो सकता है। इसलिए ऑक्सीजन संतृप्ति (सेचुरेशन) स्तर सामान्य होने की दशा में हल्का संक्रमण होने पर सीटी स्कैन कराने का कोई औचित्य नहीं है।”एम्स निदेशक ने सुझाव दिया कि अस्पताल में भर्ती होने एवं मध्यम संक्रमण होने की सूरत में सीटी स्कैन कराया जाना चाहिए।

वहीं देश भर में एक दिन में सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के 3,68,147 मामलों में से 73.78 प्रतिशत मामले बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 10 राज्यों से सामने आए हैं जबकि दैनिक संक्रमण दर भी बढ़कर 21.19 फीसद हो गई। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि महाराष्ट्र में एक दिन में सबसे अधिक 56,647 मामले सामने आए। इसके अलावा कर्नाटक में 37,733 जबकि केरल में 31,959 मामले सामने आए।