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उत्तराखंड सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे सिटी बस संचालक, ये है कारण

देहरादून: बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण वाहनों में पचास फीसद यात्रियों के संग संचालन की शर्त व किराये में बढ़ोत्तरी न करने के विरुद्ध सिटी बस संचालक हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। सिटी बस सेवा महासंघ ने देहरादून में कोरोना कर्फ्यू के कारण बंद पड़े बस के संचालन पर भी सवाल उठाते हुए टैक्स न देने का ऐलान किया है।

अप्रैल के पहले हफ्ते में कोरोना संक्रमण बढ़ने पर सरकार ने सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहनों में पचास फीसद यात्री क्षमता के साथ संचालन की अनुमति दी थी। इस दौरान ट्रांसपोर्टर सरकार से किराया पिछले वर्ष की तरह दोगुना करने की मांग कर रहे थे। परिवहन विभाग ने इसका प्रस्ताव भी भेजा, लेकिन सरकार ने इन्कार कर दिया। दरअसल, पिछले साल कोरोना अनलॉक के तहत जब वाहनों का संचालन आरंभ हुआ था, तब सरकार ने पचास फीसद यात्री की शर्त के साथ किराया दोगुना कर दिया था। इस बार मांग पूरी न होने पर सूबे के करीब दस हजार निजी बस संचालक अपने वाहन के परमिट सरेंडर कर चुके हैं। वहीं, कोरोना कर्फ्यू के कारण दून में सिटी बस, विक्रम व ऑटो का संचालन बंद है।

ऐसे में सिटी बस सेवा महासंघ की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव दिया गया था कि बस संचालकों को सरकार बीस रूपये प्रति किमी अदा करे, जिसके बाद संचालक यात्रियों को मुफ्त ले जाएंगे। दूसरा प्रस्ताव दिया गया कि सरकार रोजाना 1920 रुपये प्रति बस दे, डीजल दे और टैक्स माफ कर दे तो भी बस संचालक यात्रियों को मुफ्त में ले जाएंगे।

महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने सरकार से सिटी व निजी बस मालिकों को प्रतिमाह के दस हजार रुपये और चालक-परिचालकों को पांच-पांच हजार रूपये देने की मांग की है। इसके साथ ही एक साल का टैक्स माफ व बीमा में छूट की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि बस में पचास फीसद यात्री बैठाए जाएंगे तो बस संचालक टैक्स व बीमा भी आधा ही देंगे।

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Author: nirbhiknazar

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