पटना: कोरोनावायरस संक्रमण से उबरे मरीजों को इन दिनों ब्लैक फंगस से भी जूझना पड़ रहा है। बिहार की बात करें तो पोस्ट कोविड मरीजों में अब तक ब्लैक फंगस के 25 मामले मिल चुके हैं। बीते 24 घंटे के दौरान ही राज्य के विभिन्न भागों के रहने वाले नौ नए मरीज मिले हैं। ब्लैक फंगस के सर्वाधिक सात मरीज पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज करा रहे हैं। खतरनाक बात यह है कि मई के अंत तक ब्लैक फंगस के 1000 से 1500 तक मामले समाने आ सकते हैं।
बिहार में 24 घंटे के दौरान मिले नौ मरीज
बीते 24 घंटे के दौरान मिले ब्लैक फंगस के मरीजों में तीन पटना एम्स में, तीन पटना के बोरिंग रोड स्थित वेल्लोर ईएनटी सेंटर में, दो पटना के पारस अस्पताल में तथा एक कैमूर जिले के कुदरा स्थित रीना देवी मेमोरियल कोविड डेडिकेटेड अस्पताल में भर्ती हैं। पटना एम्स में इलाज करा रहे तीन मरीजों में एक मुजफ्फरपुर का तथा दो पटना के हैं। पटना के वेल्लोर ईएनटी सेंटर में भर्ती मरीज पटना, बक्सर और औरंगाबाद के हैं। पटना के पारस अस्पताल में भर्ती किए गए दोनों मरीज पटना के हैं। वेल्लोर ईएनटी सेंटर में ब्लैक फंगस के तीनों मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है।

अब तक मिले 25 मरीज, पटना एम्स में सात
अभी तक पटना में मिले मरीजों की बात करें तो पटना एम्स में सात मरीज भर्ती हैं। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान ( IGIMS ) में दो, रूबन मेमोरियल अस्पताल में दो और पारस अस्पताल में चार मरीज मिल चुके हैं। पटना एम्स में भर्ती एक मरीज की आंख की रोशनी चली गई है तो दूसरा बेहोशी की स्थिति में है। एक के ब्रेन में भी संक्रमण है। पूरे राज्य में अभी तक ब्लैक फंगस के 25 मामले सामने आ चुके हैं।

ब्लैक फंगस संक्रमण के लक्षण, एक नजर
ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों के नाक, चेहरे, दांत, आंख और सिर में दर्द रहता है। उनके नाक से पानी और खून निकल सकता है। नाक में काली पपड़ी भी जम सकती है। आंखें लाल हो सकतीं हैं, उनमें सूजन हो सकती है। कई मामलों में आंखें बाहर निकल आती हैं तथा रोशनी भी जा सकती है। प्रारम्भिक अवस्था में पहचान हो जाने पर यह संक्रमण दवा के कुछ डोज से ही ठीक हो जाता है। देर होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है।