देहरादून: कोरोना से अपनों को खोने का जिक्र करते-करते जीवट माने जाने वाले आयुुष मंत्री हरक सिंह की आंखों से आंसू छलक आए। कुछ शायद अपनों को खोने का दर्द, कुछ असहाय होकर देखते रह जाने की कसक और कुछ खुलकर कुछ न कर पाने का दर्द ही है जो आंखों से बयां हो गया। बता दें कि मंत्री हरक सिंह कर्मकार बोर्ड के विवाद के दौरान भी सार्वजनिक रूप से बात करते हुए हरक सिंह रोए थे, लेकिन सोमवार को विधानसभा में कारण अलग था। ये कारण शायद कोविड संक्रमण के इस दौर में बहुत कुछ न पाने का अहसास भी है। बकौल हरक सिंह मंत्री, दो डॉक्टर, एसडीएम, सीएमओ की मौजूदगी में वार्ड में शिफ्ट करते-करते उनके एक जानने वाले ने दम तोड़ दिया। एक से दिन में कुशल क्षेम पूछी, शाम को खबर आई अब वह नहीं है। दवा है, डॉक्टर हैं, आक्सीजन है लेकिन जिंदगी बच नहीं रहीं हैं।

ऑक्सीजन का इंतजाम कुछ दिन पहले हो जाना चाहिए था
संक्रमण कम होने के बावजूद मरने वालों की संख्या का बढ़ते चले जाना हरक सिंह के इस अहसास की पुष्टि भी कर रहा है। वहीं, इसी मजबूरी से कोरोना की तीसरी लहर का सामना करने की जिद भी उभर कर सामने आई और यह स्वीकरोक्ति भी कि हमने समय रहते तैयारी नहीं की।ऑक्सीजन का इंतजाम आज हम कर रहे हैं, वह कुछ दिन पहले हो जाना चाहिए था।