देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर दुख जताया। ट्वीट कर उन्होंने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा का निधन हमारे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया। उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। मेरे विचार उनके परिवार और कई प्रशंसकों के साथ हैं।
Passing away of Shri Sunderlal Bahuguna Ji is a monumental loss for our nation. He manifested our centuries old ethos of living in harmony with nature. His simplicity and spirit of compassion will never be forgotten. My thoughts are with his family and many admirers. Om Shanti.
— Narendra Modi (@narendramodi) May 21, 2021
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा सुंदरलाल बहुगुणा का निधन अपूरणीय क्षति
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिपको आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बनाने वाले सुंदरलाल बहुगुणा का निधन न केवल उत्तराखंड और भारतवर्ष बल्कि समस्त विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है। सामाजिक सराकारों व पर्यावरण के क्षेत्र में आई इस रिक्तता को कभी नहीं भरा जा सकेगा। ईश्वर दिवंगत की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल स्वजन को धैर्य व दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। pic.twitter.com/j85HWCs80k
— Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) May 21, 2021
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने जताया शोक
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने विख्यात पर्यावरणविद्, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं चिपको आंदोलन के महानायक सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवगंत की आत्मा की शांति, शोकाकुल स्वजन एवं शुभचिंतकों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि हिमालय के रक्षक सुंदरलाल बहुगुणा के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दुख हुआ।

सुंदर लाल बहुगुणा को मिले पुरस्कार और सम्मान
वर्ष 1981 पद्मश्री ( इसे बहुगुणा ने नहीं लिया )
वर्ष 1986 जमनालाल बजाज पुरस्कार
वर्ष 1987 राइट लाइवलीहुड अवार्ड
वर्ष 1989 आईआईटी रुड़की द्वारा डीएससी की मानद उपाधि
वर्ष 2009 पद्मविभूषण इसके अलावा राष्ट्रीय एकता पुरस्कार, शेरे कश्मीर अवार्ड समेत दर्जनों अन्य छोटे बड़ पुरस्कार भी इन्हें दिए गए। विश्वभारती विवि शांतिनिकेतन ने भी इन्हें डाकटरेट की मानद उपाधि प्रदान की।
सुंदर लाल बहुगुणा पर प्रमुख पुस्तकें
इकोलोजी इज द परमानेंट इकोनोमी ले: जार्ज जेम्स टेक्सास विवि
हिमालय में महात्मा गांधी के सिपाही सुंदर लाल बहुगुणा: केएस वाल्दिया
फारेस्ट एंड पीपुल्स : भारत डोगरा
धरती करे पुकार : राजकमल प्रकाशन