देहरादून: राज्य सरकार ने कोविड-19 महामारी से अनाथ हुए बच्चों या फिर घर के एकमात्र कमाने वाले की मौत होने वाले आश्रितों को बड़ी राहत दी है। सरकार ऐसे बच्चों को 21 साल तक शिक्षा देने के साथ ही तीन हजार रुपये प्रतिमाह भरण पोषण के रूप में देगी। शनिवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ऐसे बच्चों के लिए सीएम वात्सल्य योजना का ऐलान किया।
प्रिय उत्तराखंड वासियों,
आपकी सरकार ने यह तय किया है कि प्रदेश के सभी ऐसे बच्चे, जिन्होंने कोविड -19 महामारी से अपने माता – पिता को खोया है, उन सभी की जिम्मेदारी सरकार उठाएगी। इसके लिए हम 'मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना' लेकर आए है। pic.twitter.com/MbJ2iB9tn3
— Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) May 22, 2021
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया, उन सभी को इस योजना के दायरे में लाया जाएगा। राज्य के ऐसे अनाथ बच्चों की आयु 21 वर्ष होने तक उनके भरण पोषण, शिक्षा के साथ-साथ रोजगार से पूर्व प्रशिक्षण की व्यवस्था भी सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि अनाथ बच्चों की पैतृक संपत्ति के लिए नियम भी बनाए जाएंगे। इसके तहत उनके वयस्क होने तक पैतृक संपत्ति बेचने का अधिकार किसी को नहीं होगा। यह जिम्मेदारी डीएम की होगी।

नौकरियों में पांच फीसदी आरक्षण
सीएम ने कहा कि कोविड महामारी के चलते अनाथ बच्चों को सरकारी नौकरियों में पांच फीसदी आरक्षण भी दिया जाएगा। जिन परिवारों में एकमात्र कमाने वाला था और कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया, उन परिवारों को भी इसका लाभ दिया जाएगा।
डीएम को अनाथ बच्चे चिह्नित करने के निर्देश
इससे पूर्व शनिवार दोपहर को सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग से समीक्षा के दौरान सीएम ने सभी जिलाधिकारियों को ऐसे बच्चों को तत्काल चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड मामलों में कमी देखने को मिल रही है, फिर भी पूरी तरह से सावधान रहने की जरूरत है। किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बायोमेडिकल वेस्ट के सही तरीके से निस्तारण पर भी ध्यान देने को कहा। नगर निकायों में शहरी विकास विभाग और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतीराज विभाग इस आदेश को सुनिश्चित कराएंगे।