देहरादून: हाल में ही हुए कई आईएफएस अफसरों के तबादलों पर सवाल उठने लगे हैं। विभाग के ही अफसरों ने इसमें नियमों की अनदेखी की बात कही है। उनका कहना है कि तबादले बिना सिविल सर्विस बोर्ड की मंजूरी के किए गए। क्येांकि इनमें से कई आईएफएस को छह सात महीने में ही बदलकर मनमाना चार्ज दे दिया।

पिछले माह 27 अप्रैल को वन विभाग ने 23 आईएफएस के तबादले किए थे। जिसमें से कईयों को महत्वपूर्ण चार्ज दिए गए। जिसमें से कुछ को तो बिना योग्यता के ही वो पद दे दिए थे। जो कि उन्होंने ज्वाइन भी नहीं किए। इस पर भी कई सवाल उठे थे और उन्हें बाद में केंसिल कर दिया गया था। लेकिन अब सभी तबादलों को गलत बताया गया है। विभागीय अफसरों का कहना है कि आईएफएस के तबादले बिना सिविल सर्विस बोर्ड के नहीं किए जा सकते। लेकिन इन तबादलों के लिए सिविल बोर्ड की बैठक कर मंजूरी नहीं ली गई। शासन ने सीधे ही लिस्ट बनाकर तैयार की और वन मंत्री व सीएम की मंजूरी के बाद जारी कर दी। इसमें ऐसे कई तबादलें भी हुए जिनमें बोर्ड आपत्ति लगा सकता था। क्योंकि बिना किसी ठोस कारण के आईएफएस अफसरों को छह सात माह के दिए चार्ज हटाकर मनमाने चार्ज दे दिए।
जो भी तबादले हुए थे वो पूर्व सीएम त्रिवेंद्र के समय में सिविल बोर्ड में गए थे। तभी से फाइल अटकी थी। कुछ एक नाम इसमें नए जोड़े गए थे। इतना वन मंत्री व सीएम के अधिकार में है। वैसे भी कुछ आईएफएस की निजी दिक्कतों के चलते उनके कार्यभार बदले गए थे। इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई।
-डा. हरक सिंह, वन मंत्री