भागलपुर: कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र देकर कहा है कि भागलपुर के सरकारी अस्पतालों में कोरोना जांच की स्थिति दयनीय है। गड़बड़ी के शिकार वे खुद हो गए है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि 24 मई को मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच के लिए अपना सैंपल दिया। जो रिपोर्ट मिली उसमें जांच की तिथि 25 मई अंकित मिली। जबकि चिकित्सक के रिपोर्ट में हस्ताक्षर 24 मई का ही है। जो लापरवाही का द्योतक है। पुन: फिर इसी अस्पताल में 25 मई को आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया। फिर 26 मई को जांच की तिथि दी जाती है, रिपोर्ट निगेटिव मिली। जो आश्चर्य का विषय है कि तीन दिन के बाद ही मेरे रिपोर्ट में तब्दीली हो गई। साथ ही मैंने अपनी पत्नी की कोरोना जांच के लिए 25 मई को सदर अस्पताल में सैंपल दिया। जिसकी एंटीजन टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव मिली, फिर मैंने पत्नी का आरटीपीसीआर जांच मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया। वहां आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। फिर 26 मई को सरकार द्वारा अधिकृत जाँच घर पैथकाइंड डाग्नोस्टिक में जांच कराई। वहां रिपोर्ट निगेटिव आई। दोनों सरकारी अस्पताल में अलग-अलग रिपोर्ट से दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सरकारी अस्पतालों में जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। क्योंकि जिस तरह से वाक्या मेरे साथ हुआ। वह आम जनता के साथ भी होता है तो उनके बीच में भय की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने उक्त मामलों में टीम का गठन कर जांच कराई जाएं।

दूसरी तरफ मायागंज अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने कहा कि एंटीजन टेस्ट में जिसका भी पॉजिटिव आएगा वो वह सौ फीसदी पॉजिटिव ही रहेगा। जिनका निगेटिव आएगा तो आरटीपीसीआर जांच हो के बाद फाइनल रिजल्ट मिलता है। जहां तक तिथि सवाल है तो वह मशीन रीड नहीं कर पाया होगा तो लिखा गया होगा। इसमें मशीनरी का दोष हो सकता है, चूंकि मशीन 24 घंटा चालू रहती है तो कभी -कभी फॉल्ट हो सकता है।