नई दिल्ली: नीति आयोग ने गुरुवार को सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी सूचकांक के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रैंकिंग जारी की है। इसमें हरियाणा और उत्तराखंड सबसे तेज तरक्की करने वाले राज्य के रूप में उभरे हैं। हरियाणा ने 10 जबकि उत्तराखंड ने 8 अंकों की सबसे तेज प्रगति की है। इसमें केरल ने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। वहीं, राज्यों में बिहार सबसे निचले पायदान पर रहा। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक केरल ने 75 अंक के साथ शीर्ष राज्य के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा, जबकि 74 अंक के साथ हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु को दूसरा स्थान मिला। वहीं, इस साल के भारत सूचकांक में बिहार, झारखंड और असम सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने गुरुवार को भारत एसडीजी सूचकांक का तीसरा संस्करण जारी किया।
नीति आयोग द्वारा किए गए सर्वे के अंतर्गत संपूर्ण देश में शैक्षिक गुणवत्ता की सूची में 70 अंक के साथ उत्तराखण्ड को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। यह संपूर्ण उत्तराखण्ड वासियों के लिए गर्व का विषय है। प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के प्रति राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। pic.twitter.com/uIHwHIPZEx
— Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) June 4, 2021
आंकड़ों में उत्तराखंड ने 2019-20 के मुकाबले वित्तवर्ष 2020-21 में 8 आंकड़ों की प्रगति के साथ कुल 72 अंक हासिल किए हैं और रैंकिंग में सातवें स्थान पर है। वहीं, हरियाणा ने 10 अंकों की प्रगति के साथ कुल 67 प्वाइंट हासिल किए हैं। यूपी में 5 अंकड़ों का सुधार आया है और कुल 69 प्वाइंट मिले हैं। वहीं, झारखंड को 3 प्वाइंट के सुधार के साथ 56 और बिहार को 2 प्वाइंट के सुधार के साथ 52 अंक मिले हैं। केंद्रशासित राज्य में दिल्ली ने 7 प्वाइंट के सुधार के साथ 68 अंक हासिल किए हैं। नीति आयोग के मुताबिक, सभी राज्यों में निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर काम किया जा रहा है और रैंकिंग में कोई भी आकांक्षी राज्य नहीं है।

उत्तराखंड में शांति स्थापना के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन
राज्यों में प्रदर्शन की बात की जाए तो दिल्ली ने गरीबी हटाने, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में काम किया है। यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड में साफ और सस्ती ऊर्जा की दिशा में प्रगति के लक्ष्य हासिल हुए हैं। उतराखंड में शांति स्थापना और न्याय के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन रहा है।
प्रगति का मूल्यांकन
सूचकांक की शुरुआत दिसंबर 2018 में हुई थी और यह देश में सतत विकास लक्ष्यों के आधार पर प्रगति की निगरानी के लिए प्रमुख साधन बन गया है। तीसरे संस्करण में 17 ध्येय, 70 लक्ष्यों और 115 संकेतकों को शामिल किया गया था जिसमें प्रदर्शन के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की गई है। सूचकांक के जरिये नीति आयोग सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रगति का मूल्यांकन करता है।
दुर्लभ डेटा आधारित पहल
राजीव कुमार ने कहा कि एसडीजी भारत सूचकांक के जरिये एसडीजी की निगरानी के हमारे प्रयास को दुनियाभर में व्यापक रूप से सराहा गया है। एसडीजी पर एक समग्र सूचकांक की गणना करके हमारे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को श्रेणीबद्ध करने के लिए यह एक दुर्लभ डेटा आधारित पहल है।