देहरादून। उत्तराखंड के सदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए अब बार-बार शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए प्रदेश के सात जिलों में कैंसर केयर यूनिट खोलने जा रहा है। यहां मरीजों को कीमोथेरेपी के इंजेक्शन देने के साथ ही विशेषज्ञों से टेली कंसलटेशन भी कराया जाएगा। उत्तराखंड में इस समय एम्स, ऋषिकेश और हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में कैंसर के मरीजों का इलाज किया जाता है। प्रदेश में अधिकांश कैंसर के मरीज इन दोनों अस्पतालों के अलावा दूसरे राज्यों के कैंसर अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं। इसमें सबसे अधिक समस्या कीमोथेरेपी को लेकर होती है। इसके लिए उन्हें नियमित अंतराल पर इन अस्पतालों में आना होता है। उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को इससे काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इसमें उनका पैसा और समय दोनों ही अधिक लगता है।

इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वाथ्य मिशन (एनएचएम) से प्रदेश के सभी 13 जिलों में कैंसर केयर यूनिट खोलने के लिए बजट देने का अनुरोध किया था, मगर केंद्र सरकार ने केवल सात जिलों के लिए 35 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया। इस बजट से प्रत्येक जिले में पांच-पांच लाख रुपये की लागत से कैंसर केयर यूनिट बनाई जाएगी। निदेशक, एनएचएम सरोज नैथानी ने बताया कि ये यूनिट उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर व अल्मोड़ा में खोली जाना प्रस्तावित है। यहां चार बेड की यूनिट बनाई जाएंगी, जिसमें फिजिशियन की तैनाती की जाएगी।
ये फिजिशियन मरीजों को कीमोथेरेपी का इंजेक्शन लगाने के साथ ही टेली कंसलटेशन के माध्यम से उन अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सक से मरीज के स्वास्थ्य के बारे में स्वास्थ्य के बारे में जानकारी का अदान-प्रदान कर सकेंगे, जहां से मरीजों का पहले से ही इलाज चल रहा है। निदेशक एनएचएम ने कहा कि उच्च स्तर से अनुमति प्राप्त करने के बाद जल्द ही कैंसर केयर यूनिट खोलने का काम शुरू कर दिया जाएगा।