देहारादून: हरीश रावत ने अपनी फेसबुक पोस्ट मे लिखा है………….
मैं #उत्तराखण्ड व उत्तराखण्ड के बाहर बसे हुए हमारे प्रवासी बंधु और उत्तराखण्ड के शुभचिंतको से प्रार्थना करना चाहता हॅू कि वो मुझसे #फेसबुक पेज के माध्यम से जुड़ें।
मैंने अपने लेखन सीरीज में उत्तराखण्ड के लिए क्या लाभदायक है, क्या हमारी योजनाएं थी, उनको #जो_न_हो_सका’’ शीर्षक के तहत तेरह लेखों में वर्गीकृत किया । कुछ समय पहले मैंने ‘‘#उत्तराखण्ड_से_उत्तराखण्डियत_तक_की_यात्रा’’ को लेकर भी एक सीरीज में कुछ छोटे-2 लेख लिखे हैं। अब मैं 3 श्रृंखलाओं में अपने फेसबुक पेज पर यह लिख रहा हॅू कि कौन सी #योजनाएं ऐसी थी जिनको मैं अपने कार्यकाल में परवान नहीं चढ़ा सका और कौन सी योजनाएं ऐसी थी जो मेरी सरकार जाने के बाद, नई सरकार ने आते ही जिनकी भ्रूण हत्या कर दी और कुछ योजनाएं जिनकी बाल हत्या कर दी गई। ‘‘#मेरा गाॅव-मेरी सड़क’’ जैसी योजना जिनकी भरी जवानी में हत्या कर दी गई मैं उनका उल्लेख भी कर रहा हॅू।

मेरा आपसे आग्रह है कि जो लेख मैंने लिखे है आने वाले लोगों के लिये बहुत काम आयेंगे। इनसे एक #वैचारिक मंथन चल सकता है।आपके मन और आपसे जुड़े हुये लोगों के बीच में भी चल सकता है। मेरा आपसे आग्रह है कि जो मेरे साथ फेसबुक पेज, टि्वटर, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम पर जुड़े हुए हैं इन्हें जरूर देखें और जो लोग नहीं जुड़े हैं, यदि उन तक मेरा संदेश पहुंच रहा है, तो वो भी जुड़ें और जो जुड़े हैं वो अपने #अड़ोस-पड़ोस, दोस्तों, ईस्ट मित्रों से भी मेरे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिये कहें ताकि उन तक भी मैंने #उत्तराखण्ड_के_विषय में क्या सोचा, क्या किया, उस सब की जानकारी पहुंच सके।