रामनगर: देश से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों को बचाने का प्रयास अब कॉर्बेट पार्क से शुरू होने जा रहा है। इसके तहत पार्क अधिकारी गिद्धों के रहन-सहन और बर्ताव जानने के लिए कॉर्बेट में गिद्धों पर रेडियो टैगिंग इस्तेमाल करने जा रहे है। झुंड में रहने वाले किसी एक गिद्ध पर टैगिंग कर मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। इसके बाद संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार होगी। 1288 वर्ग किमी में फैले पार्क में वन्यजीवों और पक्षियों की तादाद अधिक है। पार्क के कई जोन में सौ से 150 गिद्ध देखने को मिलता है। मवेशियों को लगने जानी वाली वैक्सीन, दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से गिद्ध की विलुप्ति के कगार है। विशेषज्ञों की माने तो पार्क में भी कई गिद्ध दिखते थे। पार्क अफसरों के अनुसार पहली बार गिद्ध पर रेडियो टैगिंग इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे गिद्धों के मूवमेंट, उसका भोजन खाने का तरीका और व्यवहार का पता चल सकेगा।
कॉर्बेट में आठ प्रकार के गिद्ध
पक्षी विशेषज्ञ संजय छिम्वाल ने बताया कि देश में नौ प्रजाति के गिद्ध मिलते हैं। कॉर्बेट में आठ प्रजाति के वल्चर दिखे हैं। इसमें किंग वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, हिमालयी ग्रिफर आदि काफी देखने को मिले हैं। उनका कहना है कि मौजूदा समय में गिद्धों का संरक्षण होने बेहद जरूरी है।
