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राज्य आंदोलनकारियों की नौकरी पर संकट, आगे देखिये क्या होता है फैसला ?

देहरादून: उत्तराखंड में क्षैतिज आरक्षण के आधार पर राज्य सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी पाने वाले राज्य आंदोलनकारियों की नौकरी पर फिर संकट छाने लगा है। अपर सचिव रिद्धिम अग्रवाल ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के इन नौकरियों को असंवैधानिक बताने वाले आदेश का हवाला देते हुए राज्याधीन सेवाओं में राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण के संबंध में पारित आदेश का पालन करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेज कर इस मामले में अद्यतन स्थिति से शासन को अवगत कराने के भी निर्देश दिये हैं।


उल्लेखनीय है कि इस मामले में याचिकाकर्ता प्रशांत तड़ियाल ने वर्ष 2011 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य आंदोलनकारी श्रेणी के अंतर्गत राजकीय सेवा में जो कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी नियुक्तियां असंवैधानिक हैं, इसलिए इन्हें निरस्त किया जाए। उच्च न्यायालय ने पांच दिसम्बर 2018 को इस मामले में अपना आदेश सुनाते हुए राज्य आंदोलनकारियों की पूर्व में की गयी नियुक्तियों को असंवैधानिक मानते हुए निरस्त करने के आदेश जारी कर दिये थे। उच्च न्यायालय के आदेश पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इसी तिथि यानी पांच दिसम्बर 2018 को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, विभागाध्यक्षों व जिलाधिकारियों को राज्याधीन सेवाओं में राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण के संबंध में पारित आदेश के क्रियान्वयन के लिए पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि राज्य आंदोलनकारियों के संबंध में जारी सभी परिपत्र और नियमों, अधिसूचनाओं के अनुसरण में सरकार द्वारा नियुक्तियां करने के सभी परिणामी आदेश निरस्त माने जाएंगे। लिहाजा सभी विभागाध्यक्ष उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें। हालांकि उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार व ऊधमसिंह नगर की एक याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय में एसएलपी यानी पुर्नविचार याचिका दाखिल की है, जिस पर करीब दो वर्ष में अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। इस बीच हाल ही में याचिकाकर्ता प्रशांत तड़ियाल ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बताया कि सरकार ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया है, जिस पर सरकार को अपना जवाव दाखिल करना है। इस मामले में अपर सचिव रिद्धिम अग्रवाल ने गत 23 जून को सभी विभागाध्यक्षों को पत्र लिख इस मामले में कार्यवाही करते हुए अद्यतन वस्तुस्थिति यथाशीघ्र गृह विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किये हैं।

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Author: nirbhiknazar

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