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बीजेपी ने २ दिन तय कर दिया नया सीएम, विपक्ष में २ हफ़्तों बाद भी नहीं तय हो पा रहा नेता प्रतिपक्ष

देहरादून: सत्ता पक्ष में मुख्यमंत्री के पद को लेकर उठे तूफान को संगठन के रणनीतिकारों और विधायकों ने मिल बैठकर 20 मिनट में शांत कर दिया। वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस में 20 दिन बाद भी नेता प्रतिपक्ष की खोज जारी है। भाजपा ने कुमाऊं से मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस की उलझन और बढ़ा दी है। इसे भाजपा का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। कांग्रेस पर अब विधायक मंडल का नेता चुनने को लेकर दबाव बन गया है। सत्तारूढ़ भाजपा से पहले वह नेता चयन की उलझन में फंसी थी, लेकिन हल वह अब तक नहीं निकाल पाई है। जबकि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता दो दिन में नेता प्रतिपक्ष घोषणा होने का दावा कर रह थे। हालात बता रहे हैं कि नेता प्रतिपक्ष की घोषणा होने में कांग्रेस को अभी हफ्ता-दस दिन और लगेंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार अभी तक कांग्रेस जिस रणनीति पर काम कर रही थी, उसमें नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गढ़वाल के किसी ठाकुर नेता को दिए जाने और प्रदेश अध्यक्ष के पद पर कुमाऊं से किसी ब्राह्मण चेहरे को लाने की थी, लेकिन सत्ता पक्ष ने कुमाऊं के साथ तराई और युवा चेहरे पर दांव लगाते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पुष्कर सिंह धामी को बैठा दिया।


ऐसे में अब कांग्रेस को सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए नए समीकरण तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है। अब तक कांग्रेस प्रदेश को राजनीतिक अस्थिरता के भंवर में झोंकने का आरोप भाजपा पर लगा रही थी लेकिन अब खुद नए सियासी समीकरण तलाशने के लिए मजबूर हो गई है।  बताया जा रहा है कि पिछले दिनों पार्टी प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और दोनों सहप्रभारियों ने तीन दिन चिंतन के बाद नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जो प्लान बनाकर हाईकमान को भेजा था, उस पर अब नए सिरे से मंथन किया जाएगा। इसी उधेड़बुन में जब राज्य में इतना बड़ा सियासी भूचाल आ गया, तब भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह दिल्ली में ही डेरा जमाए हुए हैं।

एक-दो दिन में मसले का हल निकल जाएगा। हमने हाईकमान को जो फार्मूला भेजा है, हमें उम्मीद है कि उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। 

प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

 इधर, भाजपा ने जिस तरह से बदलते-बिगड़ते हालातों को बिना किसी डेमेज कंट्रोल के संभाला है, उसमें संगठन के रणनीतिकारों का अहम किरदार रहा है। जबकि कांग्रेस में संगठन के स्तर पर फिलहाल इसका अभाव दिखाई दे रहा है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली में डेरा डाले हैं तो कांग्रेस मुख्यालय भी इन दिनों सन्नाटे की चपेट में दिखाई देता है।

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Author: nirbhiknazar

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