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जल मग्न हुआ बिहार, बाढ़ से हाहाकार, हजारों लोगों ने छोड़ा घरबार

पटना: देश के कई राज्यों में भीषण बारिश हो रही है, बाढ़ जैसे हालात हैं लेकिन दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में अभी भी मानसून का इंतजार है. ऐसे में मानसून के दोनों पहलू पर बात करने की जरूरत है. बेहिसाब बारिश और नेपाल से आने वाली नदियों में उफान से बिहार में त्राहिमाम मचा है. बाढ़ की वजह से मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, शिवहर समेत पूरा उत्तर बिहार जलमग्न हैं. गांव के गांव पानी में समा चुके हैं. सड़कें समंदर बन चुकी है. कई जिलों में लगातार हो रही बारिश से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. कोसी और गंडक नदी का पानी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. ऐसे में सबकी जुबान पर एक ही सवाल है कि बिहार में शोक और बेबसी की ये तस्वीर कब बदलेगी और कब बिहार की तकदीर को बाढ़ से मुक्ति मिलेगी.

ये तो बात हुई मानसून के प्रचंड प्रहार की लेकिन देश के कई राज्यों में अभी भी बरसात नहीं शुरू हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मौसम विभाग मानसून की सही भविष्यवाणी में नाकाम हो रहा है? अब मानसूम में देरी के कारण मौसम विभाग ही आलोचनाओं के घेरे में आ गया है. ये भी पूछा जाने लगा है कि क्या मौसम को लेकर सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता. मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र का कहना है कि दुनिया में किसी भी पूर्वानुमान मॉडल में सर्वश्रेष्ठ तकनीक के साथ भी 100 प्रतिशत सटीकता नहीं होती है. मानसून में सिर्फ 55-60 प्रतिशत ही सटीक पूर्वानुमान होता है.

दरअसल मौसम विभाग ने कहा था कि 8 जुलाई तक देश भर में मानसून की बारिश हो जाएगी. लेकिन ये अनुमान सही नहीं निकला और सवाल उठने लगे. खैर हम उम्मीद करते हैं कि आधुनिक तकनीक के जरिए आने वाले वक्त में ये तस्वीर बदलेगी, लेकिन बिहार में बाढ़ से बेहाल जनता की तकदीर कब बदलेगी, कहना मुश्किल है. मानसून की बारिश और नेपाल से निकले तबाही के सैलाब ने एक बार फिर हिंदुस्तान में हाहाकार मचा दिया.

हर जगह जिंदगी बचाने की जंग जारी

बेलगाम बारिश और बाढ़ से बिहार में घर डूब गए, खेत खो गए, सड़कों ने जलसमाधि ले ली और हर साल की तरह इस साल भी एक बार फिर अभिषाप की तरह करोंड़ों लोगों की ज़िंदगी की जद्दोज़हद शुरू हुई. नेपाल से लगे बिहार के जिलों में हजारों लोगों की जिंदगी पर बारिश और भयंकर बाढ़ आफत बनकर टूटी और लोगों की जिंदगी पर सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया. यहां बारिश की वजह से न सिर्फ बाढ़ ने हाहाकार मचाया, बल्कि तेज बहाव के कारण कई लोगों की जान चली गई. कई परिवार ही बिछड़ गए तो कई हजार पलायन के लिए मजबूर हुए.

बिहार के कई हिस्से से विनाशकारी तस्वीरें आई. लेकिन सबसे डरावनी तस्वीर मोतिहारी में दिखी. यहां अचानक पानी की तेज धार के बीच दो जिंदगी फंस गई. नदी के रौद्र रूप में दोनों का सीधे मौत से साक्षात्कार हुआ. सिकरहना नदीं में लहरें उफान मार रही थी. इस सबके बीच यहां जिदंगी बचाने की एक जंग भी चली. नदी में डूब रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हाहाकार मच गया. अनहोनी की आशंकाओं के बीच आखिरकार दोनों की जिंदगी बच गई.

बारिश और बाढ़ से बिगड़े हालात की दूसरी भयावह तस्वीर बिहार के ही रक्सौल से आई है. घर खड़े हैं, लेकिन ज़मीन नहीं दिख रही. चारों तरफ पानी ही पानी है. यहां इस बार हालात ज्यादा भयानक है. क्योंकि इस बार बाढ़ और बारिश से रक्सौल शहर ही डूबने के कगार पर पहुंच गया है. शहर भर में 4 से 5 फीट पानी भरा है. सरिसवा नदी समंदर की तरह फैल चुकी है.

मुजफ्फरपुर में कटरा में 1000 घरों में बाढ़ का पानी

पानी से तबाही की ऐसी ही तस्वीर बिहार के मुजफ्फरपुर की है. यहां हर तरफ पानी-पानी ही है. चारों ओर नदी का प्रचंड प्रहार है. बागमती नदी खतरे के निशान को पार कर शहर में दाखिल हो चुकी है. जिससे शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है. बिहार का दूसरा सबसे बड़ा शहर मुजफ्फरपुर समंदर बन चुका है. घर टापू के तरह दिख रहे हैं. गलियां पानी में गुम हो चुकी हैं. नदियों का रौद्र रूप लोगों को रुला रहा है. हालात ये है कि कटरा प्रखंड के 1000 घरों में बाढ़ का पानी घुसा गया है. सबसे बुरा हाल गंगिया गांव का है, जहां घर पानी में डूब जाने की वजह से लोग बांध पर रहने के लिए मजबूर हैं.

मुजफ्फरपुर की तरह शिवहर जिले का हाल भी बाढ़ की वजह से बेहाल है. लगातार हो रही बारिश के कारण बागमती नदी अपनी मर्यादा लांघ शहर में दाखिल हो चुकी है. सड़कें जलमग्न है. बागमती का पानी घरों में घुस चुका है. पानी की वजह से शिवहर का मंडल कारागार टापू की तरह नजर आ रहा है. पुलिसकर्मी और जेल के अधिकारी घुटने भर पानी में तैर कर जेल के अंदर बाहर जान के लिए मजबूर है.

बिहार में कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. बावजूद इसके सरकार आंखें बंद कर लोगों की परेशानियों को नजर अंदाज कर रही है. इन्हीं वजह से बाढ़ की वजह से बेघर हुए लोगों के सामने खाने पीने तक की समस्या आ गई है.

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Author: nirbhiknazar

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