देहरादून: पूर्व सीएम हरीश रावत को सीएम का चेहरा प्रचारित करने से उपजे असंतोष को हाईकमान ने थामने की कोशिश की है। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने साफ साफ कहा कि हरीश रावत निसंदेह पार्टी के वरिष्ठतम नेता हैं, लेकिन सीएम का चुनाव सत्ता में आने पर विधायक दल और पार्टी नेतृत्व ही तय करेगा। वहीं नेतृत्व परिवर्तन के बाद कार्यकर्ताओं के स्तर पर खींचतान को महसूस करते हुए रावत ने भी एकजुटता का संदेश जारी किया है। चुनाव प्रचार समिति की कमान सौंपे जाने से प्रदेश में रावत कैंप ने उन्हें सीएम के चेहरे के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है।

धारचूला विधायक हरीश धामी साफ साफ कह ही चुके हैं, बाकी और नेता भी इसी बात को बढ़ा रहे हैं। सीएम के चेहरे के साथ चुनाव में जाने का शुरू से विरोध कर रहे निवर्तमान अध्यक्ष प्रीतम सिंह को काफी नागवार गुजर रहा है। रावत और प्रीतम कैंप में तलवारें खिंचती देख प्रदेश प्रभारी बीच बचाव में आए हैं। प्रभारी का कहना है कि पार्टी शुरू से सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ने की बात कहती रही है। इस पर अब भी अडिग है। दूसरी तरफ रावत ने अपने सोशल मीडिया पेज के जरिए कार्यकर्ताओं से एकजुटता का आह़वान करते हुए तेरा-मेरा का भाव समाप्त करने की अपील की।
मालूम हो कि गणेश गोदियाल के अध्यक्ष बनने के बाद राजीव भवन और शहर के विभिन्न स्थानों पर लगे बैनर-होर्डिंग में केवल गोदियाल और रावत ही छाए हुए हैं। निवर्तमान अध्यक्ष प्रीतम का फोटो बहुत छोटा या गायब हो गया है। हाईकमान तक यह बात पहुंची है। रावत ने कहा कि सबको मिलकर 2022 में कांग्रेस की विजय के लिए काम करना है। राज्य में केवल अध्यक्ष पद पर चेहरा बदला है। नेतृत्व आज भी वही पुराना है। इसलिये अपने पोस्टरों में, अपने व्यवहार में सभी नेतागणों को महत्व दें। रावत ने नसीहत करते हुए कहा कि नेतृत्व एक दिन में नहीं बनता है और एक पोस्टर से न बनता- बिगड़ता है। इससे केवल पार्टी का वातावरण ही बिगड़ता है। इसलिए कोई भी सहयोगी पार्टी का वातावरण बिगाड़ने का प्रयास अपने काम से जाने-अनजाने में भी न करें।
चुनाव के लिए विभिन्न कमेटियां बनाई गई हैं। सभी की अपनी अपनी अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं। सभी कमेटियां महत्वपूर्ण हैं।
देवेंद्र यादव, प्रदेश प्रभारी-कांग्रेस ‘
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पूर्व सीएम हरीश रावत के सियासी लेफ्टिनेंट माने जाने वाले राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि पूर्व सीएम हरीश रावत ही उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मुख्य चेहरा है। और जनता भी मानती है कि कांग्रेस के सत्ता में आने पर वो ही अगले सीएम होंगे। इस बाबत को पार्टी नेताओं को भी समझ और स्वीकार कर लेना चाहिए। प्रदीप ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि बात एकदम साफ है। कुछ चीजे कभी घोषित होती है और कभी नहीं। हर राज्य में चुनाव अभियान समिति में या तो प्रदेश अध्यक्ष को अध्यक्ष बनाया जाता है या फिर किसी सशक्त नेता को जिम्मेदारी दी जाती है।
राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा
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कांग्रेस की परंपरा सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में भी यही बात लागू होती है। राष्ट्रीय नेतृत्व ने शुरू से कहा है कि चुनाव सामुहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। यदि हाईकमान को चेहरा ही तय करना होता तो स्पष्ट रूप से कहा जाता है। लेकिन ऐसा हाईकमान ने कभी कहा ही नहीं।
प्रीतम सिंह, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष
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इस विषय में मेरा या किसी और का कहना कोई मायने नहीं रखता। हाईकमान कई बार स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। बीते रोज प्रदेश प्रभारी भी इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनाव के बाद सत्ता में आने पर विधायक दल ही नेता का चुनाव करेगा।
रणजीत रावत, नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष-कांग्रेस
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