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बिहार में चमकी बुखार का कहर एक बच्चे की मौत, 57 बच्चों में हो चुकी है पुष्टि, पढ़िये इस बुखार के लक्षण और बचाव

मुजफ्फरपुर: एसकेएमसीएच में चार दिनों से भर्ती एइएस पीड़ित अंकित की मौत बुधवार की दोपहर हो गयी. पांच साल का अंकित सीतामढ़ी का रहने वाला था. 24 जुलाई को उसे एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया था. उसे चमकी बुखार के लक्षण थे. उसकी हालत बेहद गंभीर थी. डॉक्टरों ने लक्षण के आधार पर पीकू वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया. जांच रिपोर्ट में एइएस की पुष्टि हुई. उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था. इस साल एइएस से मरने वालों की संख्या 12 हो गयी. अंकित से पहले मोतिहारी की सलोनी कुमारी की मौत दस दिन पूर्व हुई थी. वर्तमान में पीकू वार्ड में चार मरीज का इलाज चल रहा है. बुधवार को एक भी मरीज एइएस के भर्ती नही हुए हैं.

सबसे अधिक पारू के छह बच्चे पीड़ित

जिले में इस साल 11 प्रखंड में एइएस का केस सामने आ चुका है. बोचहां के दो, कांटी के एक, कटरा के एक, कुढ़नी के एक, मीनापुर के तीन, मोतीपुर के एक, मुरौल के एक, मुशहरी के पांच, पारू के छह, साहेबगंज के एक, सकरा के दो व शहरी इलाके के दो बच्चे में एइएस की पुष्टि हो चुकी है. इनमें 22 बच्चे स्वस्थ होने पर घर जा चुके है.

जिले के 26 बच्चे हो चुके हैं एइएस पीड़ित

इस साल अब तक आठ जिले के 57 बच्चे एइएस से पीड़ित हो चुके है. इनमेें 26 बच्चे मुजफ्फरपुर के है. तीन बच्चों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा समस्तीपुर के 1,सीतामढ़ी के 9,शिवहर के 3,वैशाली के 8,पूर्वी चंपारण के 7, पश्चिम चंपारण के 2 व मधेपुरा का एक बच्चे में एइएस की पुष्टि हो चुकी है.

इस बुखार से ग्रस्त होने पर बच्चों व व्यक्ति में ये लक्षण दिखते हैं-

  1. लगातार तेज बुखार चढ़े रहना
  2. बदन में लगातार ऐंठन होना
  3. दांत पर दांत दबाए रहना
  4. सुस्ती चढ़ना
  5. कमजोरी की वजह से बेहोशी आना
  6. चिउंटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना

चमकी बुखार से बचाव ऐसे करें

  1. बच्चों को जूठे व सड़े हुए फल न खाने दें
  2. बच्चों को उन जगहों पर न जाने दें, जहां सूअर रहते हैं
  3. खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ जरूर धुलवाएं
  4. पीने का पानी स्वच्छ रखें
  5. बच्चों के नाखून न बढ़ने दें
  6. गंदगीभरे इलाकों में न जाएं
  7. बच्चों को सिर्फ हेल्दी खाना ही खिलाएं
  8. रात के खाने के बाद हल्का- फुल्का मीठा खिलाएं
  9. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।
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Author: nirbhiknazar

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