पटना : नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। इस रिपोर्ट से पता चला है कि बिहार में 2014 से 2019 के बीच महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA) के तहत केवल 3% लोगों को ही रोजगार मिला। रिपोर्ट में कहा गया है , ‘बिहार में सबसे अधिक 88.61 लाख कैजुअल मजदूर होने के बावजूद, केवल 3.34% को जॉब कार्ड जारी किए गए थे।’ ध्यान रहे कि मोदी सरकार ने दावा किया था कि COVID लॉकडाउन के दौरान अधिकांश मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया गया था।

कैग की रिपोर्ट में बिहार के मनरेगा का खराब प्रदर्शन
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिहार में 86.61 फीसदी मजदूरों के पास जमीन नहीं है और मनरेगा के तहत किए गए कार्यों में से केवल 14 फीसदी परियोजनाएं ही पूरी हुईं। इसके अलावा जहां 2014-19 में 65% काम अधूरा रह गया, वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 61% परियोजनाओं में काम शुरू भी नहीं किया गया है।
बिहार के खराब प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए विपक्षी दल राजद ने सीएम नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ रिकॉर्ड का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं के पास केवल तीन विकल्प ही हैं। उन्होंने तीन विकल्प की बात करते हुए कहा कि बेरोजगार रहो, पलायन करो या पालन करो। एनडीए सरकार का मजाक उड़ाते हुए, राजद ने दावा किया कि यह चुनाव आयोग और कुछ लोगों द्वारा चुनी गई अक्षम सरकार है।
गौरतलब है कि राजद ने 2014-15 में नीतीश सरकार का बाहर से समर्थन किया था और 2015 से 2017 तक जदयू के साथ गठबंधन में था। बाद में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ लिया था।