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खुले आसमान के नीचे खराब हो रहे हैं केंद्र सरकार से मिले करोडो के स्वास्थ उपकरण, कांग्रेस ने उठाये सवाल

देहरादून: कोरोना को देखते हुए राज्य सरकार को सीएसआर फंड व केंद्र सरकार से करोड़ों रुपये के उपकरण, आक्सीजन सिलिंडर व दवाएं मिल रही हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इनके रखरखाव तक की उचित व्यवस्था नहीं की है। जिसके चलते खुले आसमान के नीचे बरसात के मौसम में समान की बेकदरी हो रही है।

राज्य का स्वास्थ्य महकमा संसाधनों को लेकर कितना सजग है, इसका उदाहरण चंद्रनगर स्थित केंद्रीय भंडार में देखा जा सकता है। विभाग को वैक्सीन की कोल्ड चेन मेंटेन रखने के लिए मिले डेढ़ सौ से अधिक चेस्ट फ्रीजर यहां पिछले कई माह से खुले में रखे हैं। लगातार हो रही बारिश व तेज धूप में फ्रीजर कबाड़ होने के कगार पर पहुंच गए हैं। पर इन्हें संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों तक भेजने या स्टोर में सुरक्षित जगह पर रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बताया गया कि कुछ माह पूर्व कोविड टीकाकरण शुरू करने की तैयारियों के बीच वैक्सीन की कोल्ड चेन बनाए रखने के लिए डीप फ्रीजर की जरूरत महसूस गई। तब ओएनजीसी में अपने सीएसआर फंड से स्वास्थ्य विभाग को 300 चेस्ट फ्रीजर उपलब्ध करवाए थे। इनमें कुछ स्वास्थ्य इकाईयों को भेज दिए गए, जबकि कुछ अभी भी यहां खुले में रखे हैं। लकड़ी की पैकिंग होने के कारण संभावना है कि ये खराब होने से बच गए हों, लेकिन आने वाले दिनों में बारिश से इनके पूरी तरह खराब होने की आशंका बनी हुई है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण बड़ी संख्या में इंजेक्शन, दवाएं, आक्सीजन सिलेंडर आदि भी खुले आसमान के नीचे पड़े हैं। इधर, अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि खुले में पड़ा सामान जल्द ही जनपदों में पहुंचा दिया जाएगा। जिससे यह जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए इस्तेमाल में लाया जा सके।

स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि फ्रिज चरणबद्ध ढंग से स्वास्थ्य इकाईयों में भेजे जा रहे हैं। बाकि जो सामान खुले में पड़ा है उसे जल्द जनपदों में भेजने के आदेश अधिकारियों को दिए गए हैं। सामान रखने के लिए अगल से भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि एक नया स्टोर बनना प्रस्तावित है। इसके अलावा बड़े आश्रम आदि में किराये पर सामान रखने की व्यवस्था की गई है।

कांग्रेस ने उजागर किया मामला

कांग्रेस की गढ़वाल मंडल मीडिया प्रभारी गरिमा महरा दसौनी व प्रदेश सचिव दीप बोहरा ने इंटरनेट मीडिया पर यह मामला उजागर किया। दसौनी ने कहा कि करोड़ों की लागत के फ्रीज, इंजेक्शन, दवाएं, आक्सीजन सिंलेडर सरकार की निष्क्रियता  के चलते बारिश में पड़े सड़ रहे हैं। यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर में सैकड़ों लोग की मौत हुई है। आइसीयू, वेंटिलेटर और यहां तक की आक्सीजन बेड के लिए लोग एक से दूसरे अस्पताल भटकते रहे। ऐसे में  संसाधनों की बेकदरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों के प्रति यह रवैया देखकर चिंता होती है कि कोरोना की तीसरी लहर से जंग आखिर कैसे लड़ी जाएगी। यह सामान जल्द अस्पतालों तक पहुंचना चाहिए, ताकि जनसामान्य को इसका लाभ मिल सके।

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Author: nirbhiknazar

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