रांची: तृतीय तथा चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए झारखंड के शैक्षणिक संस्थानों से दसवीं तथा बारहवीं उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता को हिमाचल प्रदेश में पहले से लागू किया गया है। झारखंड में होनेवाली नियुक्ति में भी स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक लाभ मिलने को लकर नियुक्ति नियमावलियों में किए जा रहे संशोधन के क्रम में महाधिवक्ता ने हिमाचल प्रदेश का हवाला देते हुए इसे लागू करने का परामर्श दिया था। इसके तहत आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को छोड़कर अन्य अभ्यर्थियों के लिए यहां के शैक्षणिक संस्थानों से दसवीं व बारहवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है। राज्य में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से तृतीय श्रेणी के पदों पर होनेवाली नियुक्ति को लेकर नियमावलियों में संशोधन किए जाने से नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है। अब विभिन्न विभागों में रिक्त लगभग एक लाख पदों पर नियुक्ति हो सकेगी।

बता दें कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में लगभग दो साल से कोई नई बहाली नहीं निकल पाई है। नियुक्ति नियमावलियों में विवाद इसका बड़ा कारण रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि झारखंड के शैक्षणिक संस्थानों से दसवीं तथा 12वीं उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता अनुकंपा पर होने वाली बहाली में लागू नहीं होगी।
राज्यपाल को दी बाल कल्याण परिषद के कार्यों की जानकारी
राज्यपाल रमेश बैस से शुक्रवार को झारखंड राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष पुष्पा भुवालिका एवं अन्य सदस्यों ने राजभवन में मुलाकात की। इस क्रम में उपाध्यक्ष तथा सदस्यों ने संस्था की गतिविधियों से अवगत कराया। वहीं, पूर्व सांसद अजय मारू के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने भी राज्यपाल से मुलाकात की। राज्यपाल से जीओसी, रांची मेजर जनरल राजेश कुमार तथा ह्यूमन एंड हेरिटेज केयर फाउंडेशन के अमिताभ कौशल ने भी राज्यपाल से मुलाकात की।