पटना। बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर सत्तारुढ़ दल में शामिल भाजपा और जदयू के बीच तकरार जारी है। एक तरफ जहां भाजपा के नेता बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग कर रहे हैं। वहीं जदयू के नेता लगातार इसी कानून की मांग की खारिज कर रहे हैं। इसी क्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर कहा कि महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाना “जनसांख्यिकीय विस्फोट” को नियंत्रित करने का उनका तरीका है। मंगलवार को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि शिक्षित महिला निर्णय लेने के लिए सशक्त महसूस करती है।

इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार ने भाजपा की मांग को खारिज करते हुए साफ-साफ कह दिया है कि बिहार में इस कानून की कोई आवश्यकता नहीं है, अगर कोई राज्य इसे लागू करता है, तो हमें इससे कोई मतलब नहीं है। सीएम नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हम पहले से इसको रोकने को लेकर काम कर रहे हैं। अगर पत्नियां पढ़ी होंगी तो प्रजनन दर अपने आप घटेगी। पहले बिहार में प्रजनन दर 4 प्रतिशत था, जो अब 3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। आने वाले समय में यह 2 प्रतिशत पर आ जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि कुमार ने कहा, “हमने बहुत पहले देखा था कि जिन परिवारों में पत्नी ने हाई स्कूल से आगे पढ़ाई की है, वहां प्रजनन दर स्वस्थ थी। इसलिए हमने बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए प्रोत्साहन दिया है। यह हमारे लिए आगे का रास्ता है।” वहीं भाजपा के नेता व बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार बबलू ने बुधवार को दिल्ली में फिर कहा है कि पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून बन जाए फिर जो गिनती करनी हो वो कीजिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि पहले जनसंख्या कानून बनना चाहिए उसके बाद ही जाति आधारित जनगणना की बात होनी चाहिए।