देहरादून: कंगाली की बाट जोह रहे उत्तराखंड परिवहन निगम की अजब ही कहानी है। और इसमें बड़ी लापरवाही उत्तराखंड के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी सचिव रंजीत सिन्हा के पकड़ में आ गई है । दरअसल अन्य राज्यों से आने वाले बसों को जो टैक्स उत्तराखंड को चुकाना पड़ता है उसकी रकम इतनी है कि हमारा राजस्व का एक अच्छा हिस्सा उस प्रदेश के राजस्व को बढ़ाने में लग जाता है । और इसके ऊपर जो उत्तराखंड में संबंधित राज्य से राजस्व आने की बारी होती है तो हमारे पास दूसरे राज्य से आने वाले बसों का कोई ट्रैकिंग सिस्टम नहीं है । उत्तराखंड परिवहन विभाग को यह पता ही नहीं है कि किस-किस बस अड्डे पर उत्तर प्रदेश परिवहन की कितनी बसें आती है। मसलन हम उत्तर प्रदेश को ₹36 करोड़ लगभग सालाना बसों के उत्तर प्रदेश की सीमा मे जाने के संबंध में टैक्स चुकाते हैं और उत्तर प्रदेश उत्तराखंड को महज ₹6 करोड़ के आसपास है टैक्स चुकता है ।
जबकि नैनीताल ,हल्द्वानी रामनगर, हरिद्वार ,देहरादून ,इन सभी पर्यटक स्थल है। और उत्तर प्रदेश और दिल्ली से बड़ी तादाद में लोग उत्तराखंड घूमने आते हैं। जबकि उत्तराखंड के अधिकांश सवारी बस द्वारा दिल्ली या नोएडा जाते है फिर सवाल ये उठता है कि बसों का ट्रैकिंग सिस्टम क्यों नहीं है। क्या उत्तराखंड से ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश के देवभूमि मे सवारी करते हैं ?इन सभी सवालों पर संशय बना हुआ है।

इन सभी सवालों पर सचिव परिवहन रंजीत सिन्हा ने अपनी नजरें टेढ़ी कर ली है । सचिव रंजीत सिन्हा ने 15 दिनों में विभाग को यह आख्या देने के स्पष्ट आदेश दिए कि उत्तर प्रदेश, या अन्य राज्य से कितनी बसें उत्तराखंड में आती है या अन्य राज्यों से कितनी बसें उत्तराखंड आती है और उत्तराखंड की कितनी बसें अन्य राज्यों में जाती है। और अगर बसों की गिनती में लंबे समय से लापरवाही हो रहा है तो आप यकीन मानिए कि उत्तराखंड सरकार को सैकड़ों करोड़ों के राजस्व की क्षति हो चुकी है । ये वही मेहकमा है जिसमे बज़ट के कारण विभाग के लोगों को सैलरी तक नहीं मिल पा रही है और इसके लिए उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है ।
तो सवाल है की क्यों नहीं सरकार अपनी व्यवस्थाओं को ही इतनी मजबूत कर लेती है कि विभाग को उन्हें सैलरी के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ना पड़े। इस संबंध में हमारे संवाददाता ने जब सचिव परिवहन से बात की तो सचिव परिवहन ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही अधिकारियों को बसों की ट्रैकिंग के आदेश दे दिए गए हैं अगर चूक पाई गई तो बड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।