धनबाद: राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के उपाध्यक्ष ए के झा ने कहा कि आज संपूर्ण देश को इस बात की खुशी है कि हम आजादी का 75वां वर्ष गांठ बना रहे हैं। सारा देश सजधज कर तैयार है। विधानसभा सज रहे हैं। संसद भवन सज रहा है। राष्ट्रपति भवन सज रहा है। हर राज्य की राजधानी सज रही है।चारों तरफ रोशनी ही रोशनी दिखाई दे रहा है। आजादी के इस जश्न को मना कर देश के स्वाभिमान को, देश के सम्मान को, देश की एकता को, देश की अखंडता को, देश की प्रतिभा को ऊंचा रखने का हम संकल्प दोहराते हैं। हम अपनी आजादी को, हम अपनी संप्रभुता को एकजुट रखने का संकल्प लेते हैं। एक मजबूत राष्ट्र, एक मजबूत देश ,जहां कोई बच्चा बिना तालीम का नहीं हो, जहां कोई किसान,मजदूर ,नौजवान बेरोजगार ना हो, हर हाथ को काम मिले, हर रोगी को दवाई हो, देश में चारों ओर खुशहाली हो, हर झोपड़ियों में आजादी का जश्न मनाया जाए। आजादी की सुगंध से, प्रगति की ताकत से, ऊंची सोच, ऊंची भावना की ताकत से, देश के संदेश को संपूर्ण मानवता के सामने रखकर देश के सम्मान को और गौरवान्वित करें ।यही हमारा संकल्प होता है।
आज के दिन आजादी की लड़ाई में दिवंगत हुए नेताओं ,कर्मठ योद्धाओं, शहीद भारतीयों को हृदय से हम सम्मान देते हैं। उन्हें स्मरण करते हैं। उनसे प्रेरणा लेते हैं ताकि हमारा इतिहास एक नया इतिहास के साथ जुड़ सके। हम देश के सैनिकों को सलाम करते हैं। उनके परिवार वालों को सलाम करते हैं जिनके त्याग तपस्या और बलिदान से भारतवर्ष ने कई युद्ध को जीतने का काम किया है। हमने 62 का युद्ध जीता। हमने 65 का युद्ध जीता। हमने 71 का युद्ध जीता।हमने करगिल का युद्ध जीता ।हमारे हजारों सेनाओं ने देश की रक्षा के लिए, देश के सम्मान के लिए, देश के झंडे को ऊंचा रखने के लिए ,अपनी कुर्बानी दी। आज हम उन्हें सलाम करते हैं। उन्हें याद करते हैं ताकि उनकी शक्ति से, उनकी प्रेरणा से उनकी सोच से देश को मजबूत बना सके। देश को अखंड भारत रख सके। देश की संप्रभुता को बचा सके। दुनिया में वसुदेव कुटुंबकम के महान नारे को प्रतिस्थापित कर सकें।
पिछले 18 महीने से कोरोणा महा संक्रमण काल से देश के 25 करोड़ छात्रों को, बच्चों को जो देश के भविष्य, जो देश की आशा है ,जिन पर देश टिका हुआ है। उनके विद्यालय बंद पड़े हुए हैं। 18 महीने इन बच्चों के लिए मानसिक संकट का समय रहा, मनोवैज्ञानिक संकट का समय रहा। इसका समाधान हम आजादी के 75 साल बीतने के बाद भी ढूंढने में नाकामयाब रहे ।आज आजादी के जश्न में हमें अपनी कमजोरियों को भी ढूंढना चाहिए। देश के हालात पर भी चिंतन करना चाहिए। देश जिस पर टिका हुआ है ,देश के भविष्य जिस पर टिके हुए हैं। उसकी चिंता को अपनी चिंता बनानी होगी। उसकी सोच को अपनी सोच बनानी होगी। उसकी भावनाओं का आदर करना होगा। उसकी समस्याओं का समाधान करना होगा। उनसे संवाद करना होगा। हमारी जो जिम्मेवारी है, सरकार की जिम्मेवारी, समाज की जिम्मेवारी ,देश की जिम्मेवारी उसके निर्वहन में हम कामयाब हुए या नहीं? हमें इसका भी आकलन करना चाहिए।

20 वर्ष पहले हमने सर्व शिक्षा अभियान चलाया था। हमने संकल्प लिया था कि हम बच्चों को स्कूल ले चलेंगे। उन्हें साक्षर बनाएंगे। उनके पढ़ाई की व्यवस्था करेंगेः स्कूल जाकर गरीबी के कारण बीच पढ़ाई के दरमियान में वह मजदूर ना बन सके इसके लिए हमने मिड-डे-मील चालू किया था। पिछले 18 महीने से हमारी व्यवस्था ने मिड डे मील उन बच्चों के घर तक पहुंचाने में भी कामयाबी हासिल न कर सका। हमने होटल खोला। स्टेडियम खोल दिया। सिनेमा हॉल खोल दिया। हमने सारे सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंधित आदेश के तहत लोगों के आने जाने का ,लोगों के जुटने का रास्ता प्रबंधित कर दिया। हमने चुनाव भी संपन्न कराया ।विधानसभाओं के चुनाव भी हुए ।लेकिन हमारी व्यवस्था स्कूल को खोलने में कामयाब नहीं हो सका। हमने डिजिटल इंडिया के तहत ग्रामीण क्षेत्रों तक,हर बच्चे तक, इंटरनेट के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था कराने में भी हम सफल नहीं है ।25 लाख विद्यालय जो सरकारी और गैर सरकारी हैं वह सभी विद्यालय आज बंद हैं। 18 महीने से बच्चे स्कूल, पार्क जाने से दूर हैं। सामाजिक कार्यक्रमों में, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में, राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शिरकत नहीं ले पा रहे हैं। एक तरह से हमारे बच्चे मानसिक दबाव में हैं। हमारा बजट हमारा सिस्टम इस करोना महा संक्रमण काल में देश के भविष्य को विद्यालय पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाया।हमें अपनी इस कमजोरी पर भी गंभीरता से बिना किसी आरोप प्रत्यारोप के संपूर्ण राष्ट्र की दृष्टि से चिंतन करना चाहिए । हमारे देश के 25 करोड़ बच्चों में से 8 करोड़ बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। सरकारी विद्यालय जहां लगभग 15 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं। उन विद्यालयों में व्यवस्था के अभाव का चिंतन इस आजादी के जश्न के समय अवश्य करना चाहिए। 8 करोड बच्चे जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें फी भी देना पड़ा। उनके अभिभावक आर्थिक संकट की स्थिति में भी फीस देने के लिए मजबूर थे। प्राइवेट विद्यालय के पास कोई विकल्प नहीं था क्योंकि हमने शिक्षा व्यवस्था में मजबूती से ध्यान नहीं दिया ।परिणाम स्वरूप प्राइवेट विद्यालय की व्यवस्था, उसके शिक्षकों के वेतन, उसके सारी व्यवस्था के लिए कोई बजट नहीं है। विद्यालय का एक ही बजट है वह छात्रों का फीस। छात्र फीस देंगे। विद्यालय चलेगा। विद्यालय के शिक्षको का परिवार चलेगा। हमारी सरकार को इस पर चिंतन करना चाहिए।
2 करोड़ विद्यार्थी लगभग इस देश में नवोदय विद्यालय या सरकारी पूर्ण व्यवस्था से संचालित विद्यालयों के बच्चे हैं। उन विद्यालय में भी हमने पढ़ाई की उचित व्यवस्था नहीं कर पाई। कहां कमियां रही। इस पर हर शिक्षा शास्त्री, हर विद्वत जनों को, सरकार में जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। ताकि आगे आने वाले संकट के समय हम इन बच्चों को जो देश के भविष्य हैं उनके साथ ऐसी घटना आने ना दे। कोरोणा महा संक्रमण काल में देश के लगभग दो लाख बच्चे ऐसे हैं जिसके सगे संबंधी मौत के शिकार हुए।अनाथ हो गए। हमें उन बच्चों के लिए भी इस आजादी के 75 वर्ष पर बहुत ही गंभीरता से राष्ट्रीय सोच के दायरे में चिंतन करना चाहिए।
झा ने कहा किसान 8 महीने से लगातार अपनी आवाज उठा रहा है। अपनी मांग रख रहा है। गांधीवादी तरीके से लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत संसद से लेकर सड़क तक उसकी आवाज उठ रही है। देश इसका फैसला चाहता है ।आज आजादी के 75 वर्ष में किसान रोने लगे ,किसान दुखी रहे ,किसानों के चेहरे पर उदासी रहे तो यह हमारे देश के लिए प्रश्न छोड़ता है। देश चलाने वाले लोगों को, देश के राजनीतिक व्यवस्था को चलाने वाले लोगों को, इस पर चिंतन करना चाहिए। आज हमारे चंद पूंजीपति दो आलू के चिप्स पर ₹20 हमसे वसूलते हैं। उसी किसान को हमारी व्यवस्था हमारी सरकार ₹4 किलो भी भुगतान नहीं कर पा रही है। जिस मकई के कार्न फ्लेक्स पर 1 किलो पर ₹100 पूंजीपति को भुगतान करते हैं लेकिन किसानों को ₹5 किलो भी दाम देने की व्यवस्था हम नहीं कर पाए ।हमें संवाद करनी चाहिए।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि आजादी का मतलब तभी पूरा होगा जब झोपड़ियों में आजादी के दिए जलेंगे। जब किसान के चेहरे पर खुशहाली होगी। जब मजदूरों के चेहरे पर खुशहाली होगी। हर बच्चे को तालीम मिलेगा। हर बच्चे के स्वास्थ्य की व्यवस्था सरकार करेगी ।हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा। तभी इस देश की आजादी का असली मकसद पूरा हो सकता है। हमें इस खुशहाली में भी मजदूर किसान छात्र नौजवान की समस्या पर राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन करना चाहिए। सरकार की अपनी जिम्मेवारी है ।संसद की बड़ी जिम्मेवारी है। हम जनता की भावना का आदर करें। किसानों की भावना का आदर करें। इस आजादी के जश्न में सबको बराबर हिस्सेदारी मिले। किसान मजदूर ,छात्र, नौजवान हर व्यक्ति समाज का, जब आजादी का जश्न मनाएगा तभी आजादी का असली मकसद पूरा होगा।तभी देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का भारत बनेगा।
आइए आजादी के इस 75 वें वर्षगांठ पर शिकवा शिकायत, आरोप-प्रत्यारोप से दूर हट कर समस्या की गंभीरता पर चिंतन करें और समाज के हर तबके के लोगों के आजादी के लिए, खुशहाली के लिए संकल्प लें ताकि देश के मुख्य धारा से सब एकजुट हो सके। राष्ट्रपति भवन पर, संसद भवन पर , विधानसभा भवन पर चमकता हुआ रोशनी जब दिल में चमकेगा ।आजादी दुनिया में चमकेगी। भारत दुनिया में चमकेगा। भारत की शक्ति दुनिया में बढ़ेगी। भारत दुनिया के मानवता को एक नया रूप दिखाई देगा जिससे भारत का सर ऊंचा हो। यही संकल्प हमें आज लेने की आवश्यकता है।