देहरादून: आडिट विभाग में पदोन्नति न किए जाने से कार्मिकों में निराशा है। उन्होंने सरकार पर सभी विभागों में 15 अगस्त तक पदोन्नति करने के वायदे को तोड़ने का आरोप लगाया है। उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ ने अब मुख्य सचिव को पत्र भेजकर प्रमोशन के लंबित मामलों के समाधान की गुहार लगाई है।
संघ के अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे के अनुसार वर्ष 2016 में आडिट विभाग का ढांचा स्वीकृत किया था, जिसमें लेखा परीक्षा अधिकारी के 50 पद स्वीकृत थे। विभागीय कार्मिकों में इस ढांचे से पदोन्नति की उम्मीद जगी, लेकिन यह ढांचा कागजों में ही दबा रह गया। वर्ष 2018 में इस ढांचे को पलटते हुए नया ढांचा स्वीकृत कर दिया, जिसमें लेखा परीक्षा अधिकारी के मात्र 24 पद किए गए।

पदों में कटौती से पदोन्नति के अवसर कम हो जाने पर उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ की आपत्ति पर चार पद बढ़ा दिए गए। इसके बाद आश्वासन मिला कि लेखा परीक्षा अधिकारी के पद पर वन टाइम पदोन्नति दी जाएगी, लेकिन सेवानियमावली में उक्त सहमति के विपरीत प्रविधान किया गया और जनवरी 21 में 15 रिक्त पदों के सापेक्ष 14 पदोन्नतियां हुईं। आरोप है कि इसमें पदोन्नति के मूल आधार ज्येष्ठता सूची को नजरअंदाज कर दिया गया।
तीन अधिकारियों को वरिष्ठ होते हुए भी पदोन्नति से वंचित रखा गया, जबकि उनसे जूनियर को पदोन्नति दी गई। अब संघ ने शासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए शेष बचे अधिकारियों को चयन वर्ष 21-22 में रिक्त लेखा परीक्षा अधिकारी के चार पदों के सापेक्ष पदोन्नति प्रदान करने की मांग की है।