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शपथ लेने के बाद साझा करूंगा प्राथमिकताएं, वरदान से कम नहीं देवभूमि में जिम्मेदारी मिलना – राज्यपाल उत्तराखंड

देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल बनाए गए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का मानना है कि देवभूमि तभी बुलाती है जब आपके सिर पर ईश्वर का आशीर्वाद हो और सृष्टि का वरदान हो। यह सौभाग्य है कि उन्हें सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि पर सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।  राज्य के आठवें और सैन्य पृष्ठभूमि वाले पहले राज्यपाल गुरमीत सिंह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बाखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना में सेवा के दौरान वह चंपावत के बनबसा में तैनात रहे। वह कहते हैं, 1996 से 1999 तक में मैं बनबसा में रहा। यानी राज्य के पर्वतीय परिवेश की भी उन्हें जानकारी है।


उत्तराखंड सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि है

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल(सेनि) गुरमीत सिंह का उत्तराखंड के प्रति बहुत सम्मान है। वह कहते हैं गुरू गोविंद सिंह जी का स्वरूप सैनिक, संत और विद्वान का था। उत्तराखंड सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि है। यहां सैनिक भी हैं, संत भी हैं और विद्वान भी है। ऐसी सैन्य और देवभूमि में सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

शपथ लेने के बाद साझा करूंगा प्राथमिकताएं

अपनी प्राथमिकताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि इन्हें वह शपथ लेने के बाद ही साझा करेंगे।

राज्य का सैनिक वर्ग उत्साहित

जानकारों की मानें तो सामरिक मामलों के गहरी समझ रखने वाले राज्यपाल के आने से सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों का भी मनोबल बढ़ेगा। साथ ही सीमांत इलाकों में सामरिक तैयारियों को लेकर राज्य सरकार भी उनके अनुभवों का लाभ और मार्गदर्शन मिलेगा।

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Author: nirbhiknazar

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