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बिहार में सांप का जहर निकालने के लिए सरकार से मांगी अनुमति, जानें पूरा मामला

पटना: बिहार में सांप पकड़कर उससे जहर निकालने के लिए कारोबारी प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए पटना के रहने वाले मोहित श्रीवास्तव ने राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार बबलू से मिलकर लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। इन्होंने वर्ष 2016 में जहर निकालने के लिए लाइसेंस की अनुमति मांगी थी।

सितंबर 2019 में राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पीत पत्र जारी किया था। 31 अगस्त 2021 को एक बार फिर मोहित ने आवेदन पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसके पहले इन्हें उत्तराखंड और झारखंड में सांप पकड़ने और उसका जहर निकालने का काम कर चुके हैं। इनके पास साढ़े चार सौ जहरीले सांप होने का दावा किया जाता है। राज्य में अब तक किसी को सांप से जहर निकालने का लाइसेंस नहीं मिला है।

रेस्क्यू टीम बचाएगी सांप

राज्य में सांप बहुतायत संख्या में पाए जाते हैं। हर साल बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में सांप बहकर उंचे स्थानों पर पहुंचते हैं और सर्पदंश की घटनाएं होती हैं। सांप निकलने के बाद सर्पदंश होने की स्थिति में राज्य में एंटी वेनम दवाओं का भी अभाव है। कारोबारी मोहित कहते हैं कि एंटी वेनम दवा बनाने के लिए यह जरूरी है कि सांपों को बचाया जाए और इनसे दवा निर्माण के लिए जरूरी जहर निकाला जाए। कारोबारी कहते हैं कि उनकी टीम राजधानी सहित अन्य शहरों में सांप को रेस्क्यू करने की टीम को अपने साथ जोड़ेगी।

एक ग्राम की कीमत हजारों में

सांप के एक ग्राम जहर की कीमत 18 से 25 हजार रुपये के बीच है। मोहित कहते हैं कि देश में 52 प्रजाति के सांप मिलते हैं। इनमें से मात्र चार प्रजाति के सांप ही ऐसे हैं, जिनके काटने से व्यक्ति की मौत हो सकती है। इन प्रजातियों में करैत, किंग कोबरा, रसेल्स वाइपर और सॉ शिल्ड वाइपर शामिल हैं। बिहार में किंग कोबरा और करैत जहरीले सांप की प्रजाति पायी जाती है। वह 14 सालों से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि सांप के जहर का इस्तेमाल दवा और शोध के लिए किया जाता है। सांप से निकाले गए जहर का उपयोग पुणे, हैदराबाद, मुंबई और कसौली आदि में होता है।

45 दिन में निकालते हैं जहर

बताते हैं कि वे प्रतिदिन जहर नहीं निकालते हैं। हालांकि दिन में एक बार सांप से जहर निकाला जा सकता है। जैसे मनुष्य में लार बनता है वैसे ही सांप में जहर का निर्माण होता है। लेकिन जहर के व्यावसायिक कारोबार करने वाले विशेषज्ञ जहरीले सांपों से लगभग सवा महीने में एक बार जहर निकालते हैं। बताते चलें कि कारोबारी ने अब तक हजारों सांपों को बचाया है। यह हुनर उन्होंने कोलकाता स्नेक पार्क में प्रशिक्षण प्राप्त कर सीखा।

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Author: nirbhiknazar

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