हरिद्वार: अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के कथित सुसाइड नोट को श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव एवं मनसा देवी ट्रस्ट अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने सिरे से नकार दिया है।
कथित सुसाइड नोट फर्जी
श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि कथित सुसाइड नोट फर्जी है। बड़ी साजिश के तहत पूरी कहानी बनाई गई है। अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी के बयान से बाघंबरी की गद्दी को लेकर नया मोड़ आ गया है। ब्रह्मलीन नरेंद्र गिरि के कथित सुुसाइड नोट में गद्दी का उत्तराधिकारी महंत बलबीर पुरी को घोषित किया है। वहीं रविंद्रपुरी ने 24 सितंबर को प्रयाग बाघंबरी में अखाड़े के संत-महंतों की आपात बैठक बुला ली है। संत-महंतों के सामूहिक निर्णय से ही गद्दी सौंपने का फैसला होगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री निरंजनी पंचायती अखाड़े के सचिव श्रीमहंत नरेंद्र गिरि प्रयागराज बाघंबरी पीठाधीश्वर थे। संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार को उनका कथित सुसाइड नोट सोशल मीडिया में वायरल हुआ। जिसमें महंत बलवीर पुरी को उत्तराधिकारी घोषित किया है।

बिल्केश्वर महादेव मंदिर के व्यवस्थापक हैं महंत बलबीर पुरी
महंत बलबीर पुरी निरंजनी अखाड़े द्वारा संचालित हरिद्वार में श्री बिल्केश्वर महादेव मंदिर के व्यवस्थापक हैं। अखाड़े की पुरी मढी मंदिर का संचालन करती है। महंत बलवीर पुरी पिछले कई समय से प्रयागराज में श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के साथ थे। वह उनके करीबी माने जाते हैं।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि घटना स्थल पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ हुई है। पुलिस को सूचना दिए बगैर कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। फंदे से नरेंद्र गिरि का शव उतारा गया। घटना के वक्त वहां लगे सीसीटीवी कैमरे बंद थे। श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने बताया कि 24 सितंबर को बाघंबरी में अखाड़े के संत-महंतों की आपात बैठक होगी। इसमें ही गद्दी किसे सौंपी जाएगी, इसका फैसला होगा।
कक्षा 5वीं तक पढ़े थे श्रीमहंत नरेंद्र गिरि
अमर उजाला से बातचीत में श्री निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कथित सुसाइड नोट को फर्जी बताते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि कक्षा 5वीं तक पढ़े थे। बड़ी मुश्किल से हस्ताक्षर करते थे। कथित सुसाइड नोट और हस्ताक्षर अलग-अलग हैं। साजिश रची गई है। सुसाइड नोट किसने लिखा जांच होनी जरूरी है।
आपको बता दें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से आठ पेज का सुसाइड नोट मिला था। इसमें उन्होंने बहुत से बातें लिखी हैं। सभी बातें मठ, मंदिर और गद्दी के उत्तराधिकार से जुड़ी हुई हैं। बरामद सुसाइड नोट में लिखा है कि “मै सम्मान के बिना नहीं रह सकता। मैं डिप्रेशन में हूं। मैं क्या करूं, कैसे रहूं। चंद शिष्यों को छोड़कर सभी ने मेरा बहुत ध्यान रखा है। मेरे शिष्यों का ध्यान रखिएगा।“ किसे क्या देना है और किसे गद्दी का उत्तराधिकारी बनाना है, इसका भी जिक्र किया गया है। एक तौर पर इस सुसाइड नोट में महंत ने अपनी वसीयत का भी जिक्र किया है। बेहद मार्मिक तरीके से इस सुसाइड नोट को लिखा गया था। आनंद गिरि का नाम भी इसमें है, जिन पर तमाम आरोप लगाए गए हैं। बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी के नाम का भी उल्लेख है। ये दोनों आनंद गिरि के खास हैं। इसके अलावा सुसाइड नोट में तमाम बातें लिखी हुईं हैं।

सीबीआइ जांच होगी :- अवनीश कुमार अवस्थी
अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि, महंत नरेंद्र गिरि संदिग्ध मौत की सीबीआइ जांच होगी। गृह विभाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी है। है। इस घटना पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित तमाम संत-महंत आत्महत्या पर संदेह जता चुके हैं। राजनीतिक दलों ने भी प्रकरण की सीबीआइ या न्यायिक जांच कराने की मांग की थी। मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार उर्फ सुनील चौधरी ने महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की सीबीआई जांच की मांग में पत्र याचिका दायर की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से सीबीआइ जांच की सिफारिश कर दी है।
प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त नरेन्द्र गिरि जी की दुःखद मृत्यु से जुड़े प्रकरण की मा. मुख्यमंत्री जी के आदेश पर सी.बी.आई. से जाँच कराने की संस्तुति की गई l
— HOME DEPARTMENT UP (@homeupgov) September 22, 2021
महंत नरेंद्र गिरि का पोस्टमार्टम हुआ :-
महंत नरेंद्र गिरि का पोस्टमार्टम पांच डाक्टरों के पैनल ने किया। पैनल ने बताया कि, महंत नरेंद्र गिरि की मौत फंदे में लटकने से हुई है। पर बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है। अभी फोरेंसिक जांच का विकल्प खुला हुआ है। पैनल को महंत नरेंद्र गिरि के गले में रस्सी से कसे जाने के निशान मिले हैं। विधिक मामला होने के कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इसे सीएमओ को दे दिया गया है।
सीबीआई तलाशेगी इन सवालों के जवाब
मिले सुसाइड नोट को संतों संतों द्वारा फेक बताया जा रहा है तो अब कई लोग ये सवाल ये उठा रहे हैं की क्या उस सुसाइड नोट मे लिखे नाम भी फर्जी हैं, क्या महंत नरेंद्र गिरि से उनके शिष्य की नाराजगी का फायदा हासिल करने के लिए किसी ने इस घटना को अंजाम दिया? या फिर सुसाइड नोट मे वसीयत का जिक्र होना कुछ लोगों के गले नहीं उतर रहा जिस कारण मिले सुसाइड नोट को फर्जी बताया जा रहा है ? या फिर महंत द्वारा लिखा गया पत्र सत्य है ? सवाल कई और भी हैं जिनका जवाब अब सीबीआई जांच मे पता चलेगा की आखिरकार हक़ीक़त है क्या।