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यूपी मे पैर पसार रहा जीका वायरस, कानपुर से मिले जीका वायरस के 30 नए मामले, ऐसे करें वायरस से बचाव

कानपुर: कानपुर में दीपावली के दिन जीका वायरस के संक्रमण के फैलाव में विस्फोट हो गया। अब तक के सबसे अधिक 30 संक्रमित मिले हैं। चकेरी क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन से भेजे गए सैंपल में जीका वायरल संक्रमण की पुष्टि हुई है। नए संक्रमितों में 10 महिलाएं और 20 पुरुष हैं। इसके साथ ही जीका संक्रमितों की कुल संख्या 66 हो गई है। सर्विलांस टीमों ने प्रभावित मोहल्लों में जाकर लार्वासाइडल का छिड़काव कराया। स्वास्थ्य विभाग ने चकेरी क्षेत्र के जीका प्रभावित मोहल्ले हरजेंदर नगर, एयरफोर्स परिसर, पोखरपुर, लालकुर्ती, मोतीनगर, अशरफाबाद, आदर्शनगर आदि से सैंपल भेजे थे। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि 30 व्यक्तियों की रिपोर्ट जीका पॉजिटिव आई है। इनमें 10 महिलाएं हैं।


संक्रमितों को अभी होम आइसोलेशन में रखा गया है। मच्छरदानी में रहने की हिदायत दी गई है। जो 10 महिलाएं जीका पॉजिटिव मिली हैं, उनमें कोई गर्भवती नहीं है। इसके अलावा संक्रमितों में किसी को भर्ती नहीं किया गया है। अब तक कुल 28 महिलाएं जीका संक्रमित हो चुकी हैं। इनमें एक गर्भवती है, जो होम आइसोलेशन में है। संक्रमितों के मिलने के बाद अधिकारियों ने बैठक करके स्थिति की समीक्षा की। सैंपल की जांच किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ से कराई गई थी।  रैपिड रिस्पांस टीमों ने मौके पर जाकर संक्रमितों की हिस्ट्री ली। सीएमओ डॉ. सिंह का कहना है कि आरआरटी टीमें संक्रमितों पर लगातार नजर रख रही हैं। कांशीराम अस्पताल, डफरिन और हैलट में बेड आरक्षित हैं। अगर किसी रोगी को जरूरत पड़ेगी तो तुरंत शिफ्ट कर दिया जाएगा।

दिल्ली और लखनऊ से आई इंसेक्ट कैचर की टीम अपने साथ मच्छरों के सैंपल ले गई है। इसके पहले भी दो सौ मच्छरों के सैंपल भेजे जा चुके हैं। इनमें एक मच्छर के पेट से जीका वायरस निकला है। इसके बाद विशेषज्ञ संग्रहकर्ताओं को बुलाया गया। जिस भी मोहल्ले में जीका संक्रमित मिले हैं, वहां के एडीज एजिप्टाई मच्छरों का सैंपल लिया गया। इससे क्षेत्र के मच्छरों के जीका संक्रमित होने के संबंध में पता चलेगा।

हवा और छूने से नहीं फैलता जीका
जीका वायरस हवा और रोगी को छूने, उसके पास उठने-बैठने से नहीं फैलता है। अगर मच्छर रोगी को काटने के बाद दूसरे व्यक्ति को काटेगा तभी संक्रमण होता है। इसके अलावा जीका जानलेवा भी नहीं है। 60 फीसदी लोगों को तो पता ही नहीं चलता कि संक्रमण हुआ है।वायरल लोड बढ़ने पर ही लक्षण उभरते हैं। जो पहले से किसी गंभीर रोग की गिरफ्त में हैं, तो अन्य वायरल संक्रमणों की तरह जीका भी पुराने रोग की जटिलताएं बढ़ा देगा। इसमें बुखार वाली दवाएं ही चलती हैं। रोगी सात दिन से 14 दिन के अंदर ठीक हो जाता है।

इतना बचाव कर लें तो सुरक्षित
– खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं
– फुल आस्तीन के कपड़ों से शरीर ढंके रहें
– गर्भवती महिलाएं मच्छरदानी में रहें
– एक दिन से अधिक बर्तन में पानी भरा न रखें
– लक्षण उभरें तो तुरंत जांच करा लें

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Author: nirbhiknazar

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