देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने छठ पूजा पर 10 नवंबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। प्रभारी सचिव विनोद कुमार सुमन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इस दिन पूर्व में घोषित निर्बंधित अवकाश को संशोधित करते हुए (कोषागार एवं उपकोषागार) को छोड़कर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। राज्यपाल की ओर से इसकी मंजूरी दे दी गई है।
नहाय खाय के बाद भगवान सूर्य से मांगी सुख समृद्धि
नहाय खाय के साथ सोमवार को आस्था का महापर्व छठ शुरू हुआ। द्रोणनगरी में छठ पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। खाने में लौकी की सब्जी, चने की दाल और रोटी, बिस्तर की जगह फर्श पर बिछी चटाई और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत का संकल्प लिया गया। मंगलवार को खरना से व्रत की शुरुआत होगी।

छठ व्रत रखने वालों ने सोमवार को नहाय-खाय के बाद विधि-विधान से भगवान सूर्य की उपासना की। श्रद्धालुओं ने भोजपुरी, मगही, मैथिली समेत कई लोक भाषाओं में छठ मैया के गीत गाए। बिहारी महासभा के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने बताया कि महासभा की तरफ से छठ पर्व की अधिकतर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। टपकेश्वर व चंद्रबनी में इंतजाम किए गए हैं। पूजन के लिए घाटों की साफ-सफाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस राज्य में हर पर्व को सम्मान दिया जाता है। यही वजह है कि छठ पर्व पर इतना उत्साह है।
टपकेश्वर मंदिर में बांटा प्रसाद
बिहारी महासभा की ओर से टपकेशवर मंदिर में अरवा चावल और दाल के साथ कद्दू की सब्जी का प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान बिहारी महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह ने बताया कि नहाय खाय के दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और अरवा चावल का भात प्रसाद के रूप में बनाया जाता है। इस दिन बनने वाले खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। सोमवार को टपकेश्वर महादेव मंदिर, प्रेम नगर, चंद्रबनी मंदिर में साफ-सफाई करके तीनों स्थानों पर कद्दू भात बांटा गया। इस मौके पर टपकेश्वर मंदिर में चंदन कुमार झा, रितेश कुमार, प्रभात कुमार, आलोक कुमार, अमरेंद्र कुमार, विनय कुमार, सतेंद्र सिंह अमरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
मंगलवार को खरना, नमक त्याग देंगे व्रती
मंगलवार को खरना (छोटी छठ) है। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास रख कर खीर और रोटी ग्रहण करेंगी। इसके बाद 36 घंटे का उपवास शुरू होगा। व्रती पूरी तरह नमक का त्याग कर देंगे। दिनभर उपवास रखा जाएगा, पानी भी ग्रहण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा भोजन गैस पर नहीं बनाया जाएगा। शाम को व्रती खुद गुड़ की खीर बनाकर ग्रहण करेंगे। इसके लिए लकड़ी, चूल्हे और कोयले का इंतजाम किया गया है।