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डॉक्टर ने किया पत्नी, बेटा और बेटी का कत्ल, डायरी मे लिखा “मैं अपने परिवार को कष्ट में नहीं छोड़ सकता, सभी को मुक्त करके जा रहा हूं”

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुक्रवार को एक फ्लैट में ट्रिपल मर्डर से हड़कंप मच गया. जानकारी के मुताबिक कल्याणपुर में रहने वाले एक डॉक्टर ने शुक्रवार की शाम अपनी पत्नी, बेटे और बेटी की हत्या कर दी. इसके बाद अपने भाई को मैसेज कर पुलिस बुलाने को कहा. भाई के पहुंचने से पहले ही आरोपी डॉक्टर मौके से  फरार हो चुका था. पुलिस को क्राइम सीन से एक डायरी  मिली है, जिसमें डॉक्टर ने हत्या की वजह कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोम को बताया है.

कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टर सुशील सिंह अपनी पत्नी चंद्रप्रभा, बेटा शिखर और बेटी खुशी के साथ डिवनिटी होम अपार्टमेंट के पांचवें फ्लोर पर स्थित 501 नंबर फ्लैट में रहते थे. डॉक्टर की पत्नी चंद्रप्रभा शिवराजपुर जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका थीं. बेटा शिखर CLAT की तैयारी कर रहा था. बेटी खुशी वुडवाइन स्कूल में 10वीं की छात्रा थी. शुक्रवार शाम करीब 5.32 बजे डॉक्टर सुशील ने अपने छोटे भाई सुनील सिंह को व्हाट्सएप मैसेज किया. इसमें लिखा कि भाई पुलिस को बता दो कि मैंने डिप्रेशन में चंद्रप्रभा, शिखर, खुशी को मार दिया है.

मौके से डायरी मिली है 

सुनील सिंह मैसेज पढ़ते ही आनन-फानन में अपने डॉक्टर भाई के फ्लैट पर पहुंचे. फ्लैट में सेंट्रल लॉक लगा हुआ था. गार्ड्स की मदद से दरवाजा तोड़ा तो अंदर का नाजारा देख सब घबरा गए. डॉक्टर की पत्नी और दोनों बच्चों के शव लहूलुहान  अवस्था में फर्श पर पड़े थे. सुनील ने पुलिस को सूचना दी. कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण, एडिश्नल कमिश्नर आनंद प्रकाश तिवारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे.

क्या लिखा है डायरी में

कमरे से मिली डायरी में लिखा है, “अब और कोविड नहीं. यह ओमिक्रॉन अब सभी को मार डालेगा. अब और लाशें नहीं गिननी हैं. अपनी लापरवाही के चलते करियर के उस मुकाम पर फंस गया हूं, जहां से निकलना असंभव है. मेरा कोई भविष्य नहीं है. अत: में अपने होश-ओ-हवास में अपने परिवार को खत्म करके खुद को खत्म कर रहा हूं. इसका जिम्मेदार और कोई नहीं है.”

डायरी में आगे लिखा है, “मैं लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हो गया हूं. आगे का भविष्य कुछ भी नजर नहीं आ रहा है. इसके अलावा मेरे पास कोई और चारा नहीं है. मैं अपने परिवार को कष्ट में नहीं छोड़ सकता. सभी को मुक्त करके जा रहा हूं. सारे कष्टों को एक ही पल में दूर कर रहा हूं. अपने पीछे मैं किसी को कष्ट में नहीं देख सकता. मेरी आत्मा मुझे कभी माफ नहीं करेगी. आंखों की लाइलाज बीमारी की वजह से मुझे इस तरह का कदम उठाना पड़ रहा है. पढ़ाना मेरा पेशा है. जब मेरी आंख ही नहीं रहेगी तो मैं क्या करूंगा.”

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Author: nirbhiknazar

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