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मुकदमा सुनकर “सॉफ्टवेयर” कर देता है फैसला ! ये देश कर रहा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल…

न्यूज़ डेस्क: बहुत से ऐसे काम हैं, जिन्हें पहले करने में जहां देर लगती थी, वही अब चुटकियों में हो जाते हैं. इसके लिए विज्ञान के द्वारा विकसित की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शुक्रिया कहा जा सकता है. हालांकि आज भी जिन कामों में बुद्धि के साथ विवेक की ज़रूरत होती है, वहां AI पर भरोसा नहीं किया जाता. पड़ोसी देश चीन ने एक ऐसे ही विवेक भरे काम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसके बारे में अब तक सोचा भी नहीं गया था.

चीन की टेक कंपनियों ने दुनिया का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड प्रॉसिक्यूटर तैयार कर लिया है. यानि एक ऐसा मशीनी जज, जो प्रस्तुत किए गए तर्कों और डिबेट के आधार पर फैसला दे देगा. चीन का दावा है कि इस मशीनी जज का फैसला 97 फीसदी तक सही ही होता है. इस मशीन को शंघाई पुडॉन्ग पीपुल्स प्रॉक्यूरेटोरेट की ओर से विकसित किया गया है.

तो क्या जज की नौकरी खा लेगी मशीन?

दावा किया गया है कि ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला मशीनी जज वर्कलोड को कम करेगा और ज़रूरत पड़ने पर न्याय देने की प्रक्रिया में जजों को इससे रिप्लेस किया जा सकेगा. इसे डेस्कटॉप कम्प्यूटर के ज़रिये इस्तेमाल किया जा सकेगा और इसमें एक साथ अरबों आइटम्स का डेटा स्टोर किया जा सकेगा. इन सबका विश्लेषण करके ये अपना फैसला देने में सक्षम है. इसे विकसित करने में साल 2015 से 2020 तक के हज़ारों लीगल केसेज़ का इस्तेमाल किया गया था. ये खतरनाक ड्राइवर्स, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और जुए के मामलों में सही फैसला दे सकता है.

कुछ लोगों ने जताई फैसले पर आशंका

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए एक जज ने इस बात की आशंका जताई है कि 97 फीसदी सही फैसले के बीच हमेशा मशीन होने की वजह से गलती होने की संभावना बनी रहेगी. ऐसे में अगर कोई गलत फैसला होता है तो जिम्मेदारी किसकी बनेगी? जज ज़िम्मेदार होगा, मशीन या फिर AI को ज़िम्मेदार माना जाएगा? उनका मानना है कि मशीन गलती पकड़ सकती है, लेकिन इसे फैसला लेने के लिए इंसानों की जगह नहीं रखा जा सकता.

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Author: nirbhiknazar

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