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यूपी मे इन मुद्दों को भुनायेगा जो इस बार, वही बना लेगा अपनी सरकार, पढ़िये पूरी खबर…

लखनऊ: चुनाव आयोग ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है। कुल सात चरणों में उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव कराए जाएंगे और 10 मार्च को नतीजे आएंगे। इस बार के विधानसभा चुनाव में कोरोना, महंगाई और जाति जैसे करीब छह मुद्दे काफी हावी रहेंगे और इन्हीं के बूते राज्य में अगली सरकार बनेगी।

राज्य में इस बार कोरोना अहम चुनावी मुद्दा होगा। क्योंकि पिछले साल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान राज्य की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर लोगों के सामने आई थी। कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाई जैसे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी  का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं उत्तरप्रदेश की कई नदियों में लाशें भी तैरती हुई देखी गई थी और प्रयागराज में गंगा घाट के किनारे बड़ी संख्या में लाशों को दफनाए जाने की तस्वीर भी सामने आई थी। इसलिए इस बार यह मुद्दा काफी हावी रहेगा। गौरतलब है कि यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।

इसके अलावा राज्य में कानून व्यवस्था का मुद्दा भी अगली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 2007 और 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा को मिली हार के पीछे भी कानून व्यवस्था अहम मुद्दा था। उस समय की विपक्षी पार्टियों ने इसको लेकर सपा सरकार के खिलाफ जमकर अभियान चलाया था। हालांकि वर्तमान की योगी सरकार राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार लाने का दावा करती है लेकिन विपक्षी पार्टियां भाजपा पर एकतरफा कार्रवाई और राज्य में एनकाउंटर राज लाने का आरोप लगा रही है।

इसी तरह आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ध्रुवीकरण जोरों पर है। योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अधिकांश नेता गाहे बगाहे हिंदुत्व की चर्चा करते रहते हैं। इतना ही नहीं भाजपा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ करने वाली उनकी कथित टिप्पणी को लेकर भी उन पर निशाना साध रही है। अपनी रैलियों में अमित शाह जेल में बंद मुस्लिम विपक्षी नेताओं का नाम लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साध रहे हैं।

इसके अलावा महंगाई भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। जहां विपक्षी पार्टियां महंगाई को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर है तो वहीं भाजपा ने लोगों की नाराजगी को दूर करने के लिए पिछले दिनों पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी की है। इसके अलावा सभी पार्टियां लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए मुफ्त बिजली- पानी का वादा भी कर रही है। बीते दिनों आदित्यनाथ सरकार ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निजी नलकूपों के लिए बिजली दरों में कमी की घोषणा की। इतना ही नहीं सपा और आप ने भी किसानों को मुफ्त बिजली और घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है।

उत्तरप्रदेश के चुनावी इतिहास में जाति भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। यहां की अधिकांश सीटों पर पिछड़ों और दलितों का वर्चस्व रहा है। हालांकि कई सीटों पर सवर्ण आबादी भी निर्णायक भूमिका अदा करती है। उत्तरप्रदेश में करीब 43 फीसदी ओबीसी वोटर्स, 22 फीसदी दलित, सवर्ण करीब 18 फीसदी और मुस्लिम 17 फीसदी हैं। इसलिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से जातिगत समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं।

बता दें कि उत्तरप्रदेश में 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होगा। जबकि दूसरे चरण का मतदान 14 फऱवरी, तीसरे चरण का मतदान 20 फरवरी को होगा। चौथे चरण का मतदान 23 फरवरी, पांचवें चरण का मतदान 27 फरवरी, छठे चरण का मतदान 3 मार्च और सातवें चरण का मतदान 7 मार्च का होगा।

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Author: nirbhiknazar

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