देहरादून: कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत विधानसभा चुनाव में अबकी बार केदारनाथ से मैदान में उतर सकते हैं। उन्हें केदारनाथ से टिकट मिलना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही पूर्व विधायक शैला रानी रावत और आशा नौटियाल हरक की उम्मीदवारी के विरोध में उतर आयी हैं।
हरक को बाहरी बताकर विरोध : हरक सिंह को केदारनाथ से मैदान में उतारने की तैयारी की भनक लगते ही क्षेत्र की पूर्व विधायक आशा नौटियाल और शैला रानी रावत भी शनिवार को अपनी दावेदारी के लिए भाजपा मुख्यालय पहुंच गईं। उन्होंने बाहरी व्यक्ति को टिकट देने का विरोध किया।
तो क्या शैलेंद्र रावत लौटेंगे भाजपा में: सूत्रों ने बताया कि ताजा समीकरण के बाद कोटद्वार सीट पर पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता शैलेंद्र रावत को भाजपा मैदान में उतार सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि, शैलेंद्र रावत की पार्टी में वापसी हो सकती है। नहीं तो भाजपा पैनल में से किसी को टिकट देगी।

डॉ. हरक सिंह रावत दिल्ली में होने की वजह से पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में शामिल नहीं हो पाए। पार्टी में उनकी नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है।
मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
बीते पांच सालों से हर कार्यकर्ता इस उम्मीद में है की केदारघाटी से उम्मीदवारी कर रहे स्थानीय दावेदारों को ही टिकट दिया जाए। बाहरी प्रत्याशी को थोपने का फैसला किया तो, विरोध किया जाएगा।
आशा नौटियाल, पूर्व विधायक केदारनाथ
केदारनाथ विधानसभा सीट पर संभावित उम्मीदवारों में ही किसी एक को टिकट दिया जाना चाहिए। बाहर से थोपे गए किसी भी प्रत्याशी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसका पुरजोर विरोध होगा।
शैलारानी रावत, पूर्व विधायक केदारनाथ
बहू को टिकट का आश्वासन न मिलने पर हरक नाराज
लैंसडौन सीट से अपनी पुत्रवधू के लिए टिकट का आश्वासन न मिलने से कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत एक बार फिर नाराज बताए जा रहे हैं। शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में हरक के शामिल न होने की यह मुख्य वजह मानी जा रही है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई थी। इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ ही हरक सिंह रावत भी सदस्य हैं। लेकिन हरक बैठक में शामिल नहीं हुए।
भाजपा सूत्रों ने बताया कि हरक सिंह रावत ने शनिवार को कोर ग्रुप की बैठक से पूर्व लैंसडौन और केदारनाथ सीट से टिकट को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं से चर्चा की। लेकिन लैंसडौन सीट को लेकर उन्हें कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला। इससे हरक नाराज बताए जा रहे है। सूत्रों ने बताया कि उसके बाद हरक बैठक में आने की बजाए दिल्ली रवाना हो गए हालांकि हरक सिंह रावत ने बताया कि उन्हें कोर ग्रुप बैठक की जानकारी बहुत देर से मिली।
हरक को लेकर कयासबाजी
शनिवार को कोर ग्रुप की बैठक में शामिल नहीं होने के बाद एक बार फिर डॉ हरक सिंह रावत की नाराजगी, उनके कांग्रेस में जाने को लेकर कयासबाजी होती रही। भाजपा कार्यालय में दिनभर यह मुद्दा चर्चा में रहा।