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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आरेंद्र शर्मा पर कांग्रेस आलाकमान का विश्वास, ब्राह्मण वोट पर अच्छी पकड़ के कारण पार्टी ने जताया भरोसा…

देहरादून: देहरादून का सहसपुर विधानसभा  क्षेत्र हमेशा से हॉट सीट रही है, कांग्रेस ने इस बार 2017 की हार का हिसाब चुकता करने को  अपने वरिष्ठ नेता और बड़े ब्राह्मण चेहरे आर्येन्द्र शर्मा पर भरोसा जताया है। हालांकि 2017 में यहां से तत्कालीन प्रदेश  कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को लड़ाने की भूल पार्टी ने की थी जिसका खामियाजा करारी शिकस्त के तौर पर पार्टी को झेलना पड़ा। उस वक्त भी पार्टी के धाकड़ नेता और प्रदेश के बड़े ब्राह्मण चेहरों में शुमार आर्येन्द्र शर्मा ने दावेदारी जताई थी लेकिन अंदरूनी पार्टी पॉलिटिक्स उनकी दावेदारी पर हावी रही, नतीजतन उन्हें आज़ाद उम्मीदवार सहसपुर के संग्राम में दमखम दिखाने को मजबूर होना पड़ा। ये आर्येन्द्र शर्मा की लोकप्रियता , जनता के बीच साख और जनाधार का ही नतीजा था कि निर्दलीय होते हुए भी वे करीब 22 हज़ार वोट हासिल करने में कामयाब रहे थे जबकि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी किशोर उपाध्याय को तकरीबन 25 हज़ार वोट मिले थे। इस हार के बाद खुद किशोर उपाध्याय ने कई मर्तबा यह कहा था कि वो सहसपुर से लड़ना नहीं चाहते थे, उन्हें जबरन वहां से लड़ाया गया और अगर निर्दलीय के बदले आर्येन्द्र कांग्रेस के उम्मीदवार रहते तो सहसपुर की सीट पर पंजे का परचम लहराना तय था।

किशोर उपाध्याय की बात सही और सटीक  इसलिए भी थी क्योंकि इस सीट से विजयी भाजपा  उम्मीदवार सहदेव पुंडीर को 44 हज़ार के आसपास वोट मिले थे जबकि आर्येन्द्र और किशोर को पड़े वोटों को मिला दिया जाए तो ये आंकड़ा करीब 47 हज़ार होता है इस लिहाज से अगर 2017 में आर्येन्द्र शर्मा पार्टी उम्मीदवार होते तो इस सीट का कांग्रेस की झोली में जाना तय था।  सियासी  जानकारों के मुताबिक अतीत में हुई गलती को  सुधारकर कांग्रेस ने सहसपुर के लिए आर्येन्द्र के रूप में बिलकुल सही निर्णय लिया है।

उत्तराखंड की सियासत में शांत, सौम्य और सलीकेदार शख्सियत  के तौर पर मशहूर आर्येन्द्र का नाम विकासपुरुष एनडी तिवारी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालारों में शुमार थे। तिवारी जी के सीएम काल में बतौर OSD रहकर आर्येन्द्र नें न सिर्फ सियासत के हर पहलु को करीब से जाना बल्कि विकास में लीडरशिप  और  ब्यूरोक्रेसी का साथ और सहयोग कैसा हो, जनहित में नीतियों, योजनाओं  को बनाने से लेकर उनके कार्यान्वयन तक की हर बारीकियों को जाना और समझा। कुलमिलाकर तिवारी जी के सानिध्य में रहकर आर्येन्द्र ने उन तमाम खूबियों को आत्मसात किया जो  जनता का परफेक्ट जनप्रतिनिधि बनने के लिए ज़रूरी होती है।

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Author: nirbhiknazar

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