देहरादून: बीजेपी – कांग्रेस के मुक़ाबले खुद को तीसरे विकल्प के रूप में मान रही आम आदमी पार्टी में भी बगावत कम नहीं हुई है। चुनाव से ठीक पहले AAP बगावती बिगुल बज चुका है। गढ़वाल मंडल के विकासनगर में प्रत्याशी चयन को लेकर जिलाध्यक्ष समेत 103 आप कार्यकर्ताओं ने उनकी अनदेखी का आरोप लगाते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया और AAP के बैनर झंडे पोस्टर जला दिये गए थे । और कुमाऊं के धारचूला में भी ऐसा ही मामला सामने आया जहां विधानसभा में प्रत्याशी घोषित होते ही कार्यकर्ताओं ने बगावत शुरू कर दी, आप के संगठन मंत्री ने पार्टी पर भाजपा से निष्कासित व्यक्ति को टिकट देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद नाराजगी जताते हुए 156 समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा दिया था ।

जानकारी के मुताबिक धारचूला संगठन मंत्री गोविंद राम आर्या ने प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया को पत्र भेजकर इस्तीफा दिया था । संगठन मंत्री का कहना है कि वे दिल्ली में आंदोलन के दौरान से ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने पार्टी हित में एक ईमानदार सिपाही के तौर पर कार्य किया।
BJP – CONG की तरह आप मे भी बगावत से नुकसान !
एक तरफ जहां उत्तराखंड मे बीजेपी और कांग्रेस मे टिकट वितरण के बाद पार्टी के कदद्वार विधायक और दावेदार बगावत पर उतारू हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी मे हैं वहीं आप मे भी शुरुआत हो चुकी है। आपको बता दें की आम आदमी पार्टी उत्तराखंड के चुनाव मे पहली बार किस्मत आज़मा रही है और जनता को रिझाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। लेकिन बीजेपी – कांग्रेस मे बगावत का असर इतना ज़्यादा नहीं पड़ेगा जितना आम आदमी पार्टी पर पड़ेगा। क्योंकि आम आदमी पार्टी शुरू से ही जनता को अपनी पार्टी मे एकता का पाठ पढ़ाती नज़र आ रही थी और इसीलिए आप मे बगावत जनता को आप से दूर कर रही है। एक तो आप पहले ही नवेली पार्टी है दूसरा पार्टी मे बगावत लोगों के दिलों मे घर बना रही और लोग आप पार्टी से दूर होते नज़र आ रहे हैं ।