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टिकट पर टकराव, झाड़ू में झगड़ा, बीजेपी में बगावत और कांग्रेस में कोहराम, पार्टियां कैसे घोषित करें उम्मीदवारों के नाम ?

देहरादून: भाजपा की 59 और कांग्रेस की 64 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अब दोनों ही दलों में बगावत और असंतोष की आग भड़कने लगी है। भाजपा में टिकट कटने से नाराज अल्मोड़ा, कर्णप्रयाग, द्वाराहाट व थराली के विधायकों ने बागी तेवर दिखाए हैं और वे निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं। उनके बगावती तेवरों से भाजपा की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। भाजपा को 59 में से 26 विधानसभा सीटों पर टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों के असंतोष और नाराजगी की सामना करना पड़ रहा है। यही हाल कांग्रेस का है, जहां 64 में से 25 विधानसभा सीटों पर असंतोष और बगावत के आसार दिखाई दे रहे हैं। आप मे भी बगावत कम नहीं है बीजेपी- कांग्रेस के मुक़ाबले खुद को तीसरे विकल्प के रूप में मान रही आम आदमी पार्टी में भी बगावत कम नहीं हुई है। चुनाव से ठीक पहले AAP बगावती बिगुल बज चुका है। गढ़वाल मंडल के विकासनगर में प्रत्याशी चयन को लेकर जिलाध्यक्ष समेत 103 आप कार्यकर्ताओं ने उनकी अनदेखी का आरोप लगाते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया और AAP के बैनर झंडे पोस्टर जला दिये गए थे । और कुमाऊं के धारचूला में भी ऐसा ही मामला सामने आया जहां विधानसभा में प्रत्याशी घोषित होते ही कार्यकर्ताओं ने बगावत शुरू कर दी, आप के संगठन मंत्री ने पार्टी पर भाजपा से निष्कासित व्यक्ति को टिकट देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद नाराजगी जताते हुए 156 समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा दिया था । धारचूला संगठन मंत्री गोविंद राम आर्या ने प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया को पत्र भेजकर इस्तीफा दिया था । संगठन मंत्री का कहना है कि वे दिल्ली में आंदोलन के दौरान से ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2013 दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने पार्टी हित में एक ईमानदार सिपाही के तौर पर कार्य किया।

भाजपा चार विधायक नाराज, दिखाए बागी तेवर

विधानसभा के उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान अल्मोड़ा सीट से टिकट काटे जाने से बेहद नाराज हैं और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह अब तक नहीं समझ पाए हैं कि आखिर उनका टिकट क्यों काटा गया। उधर, थराली विस सीट पर विधायक मुन्नी देवी और कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। द्वारहाट के विधायक महेश नेगी टिकट काटे जाने के पीछे साजिश करार दे रहे हैं। कैंट सीट पर परिवारवाद के खिलाफ टिकट के तकरीबन सभी दावेदार मिलकर प्रदेश संगठन महामंत्री से मिले और उन्होंने टिकट पर पुनर्विचार की मांग उठाई।

कांग्रेस में भी असंतोष के सुर

पूर्व कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस नेता हरिश्चंद्र दुर्गापाल भी टिकट काटे जाने से नाराज हैं।  सोशल मीडिया पर उनके पार्टी छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की खबरें तैर रही हैं। रामनगर विस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे रंजीत रावत भी टिकट काटे जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। उन्हें लेकर भी चर्चा है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। पूर्व दर्जा राज्यमंत्री रहे महेश शर्मा को कालाढूंगी विधानसभा सीट पर कांग्रेस का जमीनी नेता माना जाता है। 2012 और 2017 में भी वह टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने सुध नहीं ली। जिसके बाद दोनों चुनाव में उन्होंने निर्दलीय ही दम दिखाया। 2017 के चुनाव बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्व. इंदिरा हृदयेश के प्रयासों से वह पार्टी में शामिल हुए थे। हरीश रावत से लेकर प्रीतम खेमा भी उनकी दावेदारी को लेकर सहयोग की भूमिका में था। उसके बावजूद टिकट नहीं मिलना चौंकाता है। स्थिति का आंकलन कर जरूरत के मुताबिक पैरवी नहीं की। इसी तरह अन्य विधानसभा सीटों पर असंतोष की खबरों ने कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। ऋषिकेश में टिकट कटने से पूर्व प्रत्याशी राजपाल खरोला और पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण ने मिलकर जयेंद्र रमोला को प्रत्याशी बनाए जाने का विरोध किया है।

कांग्रेस की इन 25 सीटों पर बगावत !

यमुनोत्री, गंगोत्री, रुद्रप्रयाग, घनसाली, सहसपुर, रायपुर, बीएचईएल रानीपुर, यमकेश्वर, गंगोलीहाट, बागेश्वर, नैनीताल, हल्द्वानी, काशीपुर, बाजपुर, सितारगंज, नानकमत्ता, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, ज्वालापुर, झबरेड़ा, खानपुर, लैंसडौन, लालकुआं, रामनगर, कालाढुंगी।

भाजपा की इन 26 सीटों पर बगावत !

यमुनोत्री, गंगोत्री, थराली, कर्णप्रयाग, घनसाली, नरेंद्रनगर, प्रतापनगर, धनोल्टी, पौड़ी, धारचूला, कपकोट, द्वारहाट, अल्मोड़ा, भीमताल, नैनीताल, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर रोड, देहरादून, ऋषिकेश, ज्वालापुर, रुड़की, मंगलौर, लक्सर, यमकेश्वर, काशीपुर।

भाजपा और कांग्रेस में रूठने और मनाने का खेल शुरू हो गया है। टिकट की दौड़ में शामिल कुछ दावेदार तो वरिष्ठ नेताओं की मान मनौव्वल के बाद सक्रिय हो गए हैं, लेकिन कुछ अभी भी कोप भवन से बाहर नहीं निकले हैं। दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्री व केंद्रीय पदाधिकारी तक नाराज दावेदारों को फोन करके मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं बीजेपी के नेता बगावत नहीं होने की बात भी कर रहे हैं और दावेदारों को मनाने की बात भी कर रहे हैं ।

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Author: nirbhiknazar

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