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भाजपा की कोशिश मिथक टूट जाये, उत्तराखंड मे मिथक जारी रखने का कांग्रेस कर रही भरपूर प्रयास, कौन होगा पास ?  

देहरादून: उत्तराखंड में एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस के सत्ता में आने को लेकर बना मिथक इस बार भाजपा तोड़ने का दावा कर रही है। इस मिथक को तोड़ने के लिए उसके तरकश में जितने भी तीर थे, उसने उनका भरपूर इस्तेमाल किया। शनिवार को चुनाव प्रचार थमने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने का दांव भी चल दिया। बदले में कांग्रेस ने सत्ता में आने पर दुपहिया वाहनों को पूरे प्रदेश में फ्री पार्किंग की घोषणा कर डाली। राज्य के करीब 82 लाख मतदाताओं को रिझाने के लिए सत्ता की पारंपरिक हिस्सेदार रही भाजपा और कांग्रेस के ये दोनों एलान घोषणापत्र जारी करने के बाद आए हैं। इन दोनों चिर प्रतिद्वंद्वियों के मध्य तीसरा विकल्प बनने की जद्दोजहद कर रही आम आदमी पार्टी ने घोषणाओं और चुनावी वादों को परोसने के अनूठे अंदाज से मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। आप सत्ता में आए या न आए लेकिन मतदाताओं के बीच उसका शपथपत्र चर्चा का विषय तो बना ही है कि चुनावी वादा पूरा करने पर कोई भी उस पर केस कर सकता है।


प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों पर छिड़ी चुनावी जंग में भाजपा डबल इंजन के काम और मोदी और राम के नाम पर प्रचार करती दिखी। लेकिन वह अटल आयुष्मान योजना, महिलाओं को भूमिधरी का अधिकार, गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने सरीखे फैसलों को जनता के बीच प्रभावी ढंग से नहीं उठा पाई। इसके बदले वह कांग्रेस राज में जुमे की अल्पकालिक छुट्टी, मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मुद्दा बनाया और अंत में हिजाब विवाद को प्रचार में उतारकर सियासत गरमाने की कोशिश की। उसके इस कदम को हिंदू बहुल राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण की सियासत के तौर पर देखा गया। प्रचार के आखिरी दौर में समर में उतरे दिग्गज नेता जेपी नड्डा, अमित शाह, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, हिमंता बिश्वा सरमा, स्मृति ईरानी ने इन सभी मुद्दों को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर ताबड़तोड़ प्रहार किए।

जवाब में कांग्रेस का प्रचार महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और खनन के मुद्दों पर केंद्रित रहा। चारधाम चार काम के नारे के साथ उसने  तीन मुख्यमंत्री बदलने को लेकर तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा के नारे से भाजपा को असहज करने की कोशिश की। सैन्य बहुल राज्य में दोनों ही दलों ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत पर सियासी फायदे लेने और उन्हें लेकर एक-दूसरे पर निशाने साधने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। बीच-बीच में प्रचार गरमाने के लिए राहुल, प्रियंका, सुरजेवाला भी उत्तराखंड पहुंचे। आप के प्रचार की कमान अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया के कंधों पर रही तो एक दिन के लिए बसपा सुप्रीमो भी हरिद्वार पहुंची।

आप और बागियों से कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय

प्रदेश में 70 में से 11 सीटों पर भाजपा बगावत का सामना कर रही है, जबकि कांग्रेस को आधा दर्जन सीटों पर बागियों की चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। एक दर्जन सीटों पर आम आदमी पार्टी और क्षेत्रीय दल यूकेडी ने भी मुकाबले को कड़ा बना रखा है। हरिद्वार में बसपा चार सीटों पर बड़ा फेक्टर मानी जा रही है। लालकुआं से कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत को बगावत का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर में बागी सीधी टक्कर दे रहा है। रुद्रपुर में टिकट काटने से पार्टी विधायक राजकुमार ठुकराल की बगावत भी भाजपा के लिए चुनौती मानी जा रही है।

इतिहास सरकार बदलने का

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का इतिहास सरकारें बदलने का है। 2002 में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई और 2007 में भाजपा सत्ता में आ गई। 2012 में कांग्रेस की सत्ता से विदाई हुई तो 2017 में भाजपा ने सत्ता में वापसी की। चुनाव दर चुनाव एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस सरकारे बनने का यह एक मिथक बन गया है, जिसे इस बार भाजपा तोड़ने और कांग्रेस बरकरार रखने का दावा कर रही है।

155 निर्दलीय मैदान में

सियासी जानकारों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर निर्दलीय दमदार नजर आ रहे हैं। समर में उतरे 632 उम्मीदवारों से 155 निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। अब सियासी दलों और मैदान में उतरे 632 उम्मीदवारों की निगाहें प्रदेश के 81,72,173 मतदाताओं को लगी हैं।

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Author: nirbhiknazar

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