यूक्रेन मे भारतीय छात्र की मौत : शिक्षा व्यवस्था पर छिड़ी बहस, मृतक के पिता ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली: यूक्रेन में रूस के हमले के दौरान बड़ी संख्या में   छात्रों के फंसे होने और एक भारतीय  छात्र की मौत पर विवादित टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि विदेशों में मेडिसिन की पढ़ाई करने वाले 90 फीसदी भारतीय भारत में क्वालीफाइंग परीक्षा में फेल हो जाते हैं। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री ने स्थानीय मीडिया को बताया कि यह बहस करने का सही समय नहीं है कि छात्र चिकित्सा का अध्ययन करने के लिए बाहर क्यों जा रहे हैं। बता दें कि, विदेश में मेडिकल की डिग्री हासिल करने वालों को भारत में मेडिसिन प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास करना होता है।

हावेरी जिले के चलागेरी का रहने वाले नवीन यूक्रेन के खारकीव स्थित एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में चतुर्थ वर्ष के छात्र थे। वह खाने-पीने के सामान के लिए बंकर से बाहर आए थे और गोलाबारी की चपेट में आ गए, जिसमें उनकी मौत हो गई।

नवीन के पिता ने मंगलवार को दावा किया कि महंगी मेडिकल शिक्षा और ‘जातिवाद’ कुछ ऐसे कारक हैं जिनकी वजह से भारतीय विद्यार्थी डॉक्टर बनने का ख्वाब पूरा करने के लिए यूक्रेन जैसे देशों का रुख करते हैं। शोक संतप्त शेखरप्पा ज्ञानगौड़ा ने कहा कि निजी नियंत्रण वाले कॉलेजों में भी मेडिकल की एक सीट पाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और यही वजह है कि मेडिकल पेशा बहुत ही कठिन विकल्प है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनके बेटे को 10वीं में 96 प्रतिशत और 12वीं में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे और उसने डॉक्टर बनने का सपना 10वीं कक्षा में देखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्ञानगौड़ा को फोन करके अपना शोक जताया। ज्ञानगौड़ा ने कहा कि मोदी ने उन्हें उनके बेटे का शव दो या तीन दिनों के भीतर स्वदेश लाने का आश्वासन दिया है।

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