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भाजपा CM पद पर फैसला लेगी होली के बाद, मगर कांग्रेस मे खूब चला विश्वासघात ! पढ़िये पूरी खबर…

देहरादून: उत्तराखंड मे एक तरफ जहां भाजपा मे अब तक सीएम फेस पर सस्पेंस बरकरार है वहीं दूसरी कांग्रेस के अंतर्कलह की कलाई खुलकर सामने आ रही है कांग्रेस मे शीर्ष न्तेया से लेकर पार्टी कार्यकर्ता तक एक दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। हरीश रावत ने ट्वीट करके कहा है की “उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की मनगढ़ंत बात गढ़कर उन्हें ‘मुस्लिम परस्त’ साबित करने वाली ताकतें अब उनकी विधायक पुत्री अनुपमा रावत की राजनीति पर भी ग्रहण लगाने के लिए झूठ का सहारा ले रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने अपने ही प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरी के कारण हार का मुंह देखना पड़ा। उधर कांग्रेस नेता नव प्रभात का बयान सामने आया है प्रभात ने कहा, “विधानसभा चुनाव में हार के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कहीं-कहीं पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने भाजपा उम्मीदवारों की मदद की। लेकिन बात यहाँ हार पर खत्म नहीं होती अभी उत्तराखंड कांग्रेस मे लड़ाई और बढ़ेगी जब प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए दावेदार आगे आएंगे। क्योंकि कांग्रेस पीसीसी अध्यक्ष जैसे महत्वपूूर्ण पद को गोदियाल के इस्तीफे के बाद ज्यादा दिन तक खाली नहीं रखना चाहेगी।

राज्य में कांग्रेस मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के चयन में गढ़वाल-कुमाऊं के साथ जातीय समीकरणों को साधकर पार्टी आगे बढ़ी है। इस बार ये देखना होगा की नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव मे भी कांग्रेस इन बातों का ध्यान रखेगी या नहीं । आपको बता दें विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर धड़ों में तलवारें खिंच गईं थी। पूरे चुनाव में पार्टी नेताओं ने एकता दिखाने की कोशिश की, लेकिन भीतर गुटबाजी की खिचड़ी पकती रही। नतीजा हार के रूप में सामने आया।

वहीं भाजपा मे सीएम पद के चेहरे पर मंथन जारी है। भाजपा नेतृत्व ने बुधवार को अचानक कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत को दिल्ली बुला लिया है। उनके दिल्ली रवाना होने से ही सियासी हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया। सियासी गलियारे में पहले ही 80 के दशक वाले विधायक को सीएम बनाए जाने की बात चल रही थी। अब अचानक भगत को दिल्ली बनाए जाने से इसे और बल मिल रहा है। विधानसभा चुनाव-2022 में भाजपा ने 47 सीटें जीती हैं। अब सरकार गठन की तैयारी चल रही है। भाजपा ने खटीमा विधायक व सीएम पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह अपनी सीट से हार गए। तब से ही नए सीएम को लेकर तमाम तरह की अटकलें लग रही हैं। धामी को फिर से सीएम बनाए जाने की चर्चा भी जोरशोर से चल रही है। इसके अलावा सीएम पद को लेकर तमाम अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी उछल रहे हैं।

उत्तराखंड में नई सरकार के गठन को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में विचार-विमर्श का काम पूरा कर लिया है। इसमें गुजरात फॉर्मूला अपनाने और अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की गई है। उत्तराखंड में नई सरकार का गठन होली के बाद किया जाएगा। नए नेता को चुनने के लिए विधायक दल की बैठक 20 या 21 मार्च को होगी।

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Author: nirbhiknazar

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