बाराबंकी : रोगी की मौत के बाद सरकारी शव वाहन व घायल को इलाज के लिए चिकित्सालय तक ले जाने के लिए एंबुलेंस न मिलने की संवेदनहीनता की घटनाएं सोमवार को एक बार फिर सामने आई। क्षय रोगी की मौत के बाद हैदरगढ़ सीएचसी से शव को मोटरसाइकिल पर घर ले जाया गया। वहीं जैदपुर थाना इलाके में सड़क दुर्घटना में घायल रामरूप की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उसे एंबुलेंस नहीं मिल सकी। जबकि मृतकों के शव घर तक पहुंचाने के लिए शव वाहनों की व्यवस्था भी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा है।

पोखरा : सुबेहा थाने के गांव रजवापुर थलवारा गांव के 52 वर्षीय शिवशंकर गौतम क्षय रोग से पीड़ित थे। सोमवार को सीएचसी हैदरगढ़ में इलाज के लिए परिवारजन ले गए थे। डा. पंकज कुमार ने इलाज किया और मरीज को क्षय रोग के लक्षण बताया। अचानक शिव शंकर की हालत बिगड़ने पर परिवारजन सीएचसी परिसर में बरगद के पेड़ के नीचे लिटा कर मुंह पर पानी के छींटे मारने लगे इसी दौरान मौत हो गई। मृतक के गांव के ही वीरेंद्र कुमार ने शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 पर काल की। वीरेंद्र का कहना है कि उसे बताया गया कि शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं है। इसके बाद वीरेंद्र ने सीएचसी प्रभारी मुकुंद पटेल से मदद मांगी गई, लेकिन उन्होंने भी असमर्थता जताई। इसके बाद वीरेंद्र कुमार की बाइक पर पीछे शव लेकर मृतक का पुत्र बैठ गया। बाइक से शव को गांव तक ले जाया गया, जिसकी लोगों ने कई फोटो भी खींची। सीएचसी प्रभारी हैदरगढ़ मुकुंद पटेल का कहना है कि शव वाहन जिला चिकित्सालय में रहता है। सीएचसी पर उपलब्ध नहीं था।
शव वाहन सीएचसी पर नहीं होते हैं। जिला चिकित्सालय में हैं।
– रामजी वर्मा, सीएमओ बाराबंकी