देहरादून। उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा के चुनाव में हार के लिए कांग्रेस ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर हुए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बड़ी वजह माना है। हार के कारणों पर नवनिर्वाचित विधायकों, प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ दो दिन तक मंथन के बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडेय ने यह बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के विधायक, नेता एवं कार्यकर्त्ता मजबूत और जाग्रत विपक्ष की अपनी भूमिका को निभाएंगे।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की मौजूदगी में केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडेय ने पार्टी की हार के बारे में दो दिन तक समीक्षा की। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में अविनाश पांडेय ने कहा कि कांग्रेस सकारात्मक सोच और विकास के पांच वर्षीय रोडमैप के साथ जनता के बीच गई थी।
पिछली भाजपा सरकार की विफलता, महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के दाम में वृद्धि, किसानों की समस्याओं को लेकर जनता का विश्वास हासिल करने का प्रयास किया गया। कांग्रेस को इसमें सफलता नहीं मिली। प्रदेशवासियों ने सांप्रदायिकता पर अधिक विश्वास किया। भाजपा का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि मुख्य प्रतिद्वंद्वी ने सांप्रदायिक नीति पर चलकर मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाया।

भ्रम व डर पैदा कर चुनाव लड़ना दुर्भाग्यपूर्ण
उन्होंने कहा कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर कांग्रेस के घोषणापत्र में कुछ नहीं कहा गया और न ही किसी अधिकृत व्यक्ति ने टिप्पणी की। इसके बावजूद चुनाव में यह मुद्दा बना। देश में अफवाह की फैक्ट्री और इसके विशेषज्ञों के बारे में सब जानते हैं। चुनाव विकास व सरकार की उपलब्धियों के स्थान पर भ्रम व डर पैदा कर लड़ा जाता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मुस्लिम यूनिवर्सिटी के आधार पर चुनाव होना लोकतंत्र के लिए कमजोर कड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाया।
देहरादून जिले के सहसपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट की दावेदारी कर रहे अकील अहमद के क्षेत्र में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग को लेकर दिए गए पत्र पर कांग्रेस की चुप्पी के बारे में पूछने पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। अकील की इसी मांग को भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव में मुद्दा बना दिया।
बेहतरीन उम्मीदवारों को दिए टिकट
पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों, प्रत्याशियों और वरिष्ठ नेताओं के टिकट वितरण पर खड़े किए गए सवालों को उन्होंने खारिज कर दिया। अविनाश पांडेय ने कहा कि चुनाव परिणाम से पहले आठ मार्च तक बेहतरीन उम्मीदवार तय करने का सर्टिफिकेट पार्टी को दिया जाता रहा। सामूहिक निर्णय से टिकट तय किए गए। 10-12 दिन तक चर्चा के बाद केंद्रीय चुनाव समिति ने जो टिकट तय किए, उससे बेहतरीन नहीं किया जा सकता था।
टिकट पर दबाव में आने वाले नेता नहीं हरीश रावत
चुनाव परिणाम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के लालकुआं सीट से चुनाव लड़ने की विवशता का जिक्र करने पर केंद्रीय पर्यवेक्षक पांडेय ने कहा कि रणनीति के तहत यह निर्णय लिया गया। हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठतम नेता हैं और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी रहे, वह किसी के दबाव में आने वाले नहीं हैं। टिकट के संबंध में उन्होंने ही इच्छा व्यक्त की। इस बारे में हरीश रावत से ही पूछा जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष को जल्द सौंपेंगे रिपोर्ट
पांडेय ने कहा कि कांग्रेस का घोषणापत्र, चुनाव संचालन समेत सभी तैयारी उत्कृष्ट होने के बावजूद पार्टी को सफलता नहीं मिली। इन्हीं कारणों पर सुझाव, स्वीकारोक्ति और कमियों के बारे में जानकारी ली गई। पार्टी सुधार कर कैसे आगे बढ़े, इस पर विचार किया गया। समीक्षा हो चुकी है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जल्द सौंपी जाएगी।
रणजीत रावत को दिया नोटिस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पांडेय ने कहा कि भितरघात या पार्टी के साथ विश्वासघात की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो, अनुशासन तोडऩे पर उसे बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत की पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर पैसे लेकर टिकट वितरण करने संबंधी टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि यह गैर जिम्मेदार बयानबाजी है। इस मामले में उन्हें नोटिस दिया गया है।
चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे और सामूहिक नेतृत्व को लेकर बने असमंजस को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह निर्णय सामूहिक था। चुनाव में सभी ने अपनी ओर से पूरा योगदान दिया। इसमें कुछ कमजोरी रह गई, इसे पार्टी स्वीकार करती है। चुनाव में जिन व्यक्तियों ने पार्टी के लिए अथक परिश्रम किया, उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
वरिष्ठ नेताओं के साथ भी हुई बैठक
इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडेय ने शेष रह गए दो जिलों हरिद्वार और देहरादून की विधानसभा सीटों पर भी हार के कारणों की समीक्षा की। विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा के बाद अविनाश पांडेय व देवेंद्र यादव ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी एक-एक कर बैठक की।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व मंत्री यशपाल आर्य, दिनेश अग्रवाल, हीरा सिंह बिष्ट, राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल शामिल हुए। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत, पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष करण माहरा, राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन, प्रकाश जोशी, विधायक आदेश चौहान समेत बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं, जिलाध्यक्षों ने भी केंद्रीय पर्यवेक्षक को सुझाव दिए।