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कल विधान सभा सत्र, कांग्रेस मे कलह और कोहराम, कैसे होगा सदन मे संग्राम, कांग्रेस अपनों से ही अब तक परेशान !  

देहरादून: उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा का तीन दिवसीय पहला सत्र कल 29 मार्च से प्रारंभ होगा। सत्र में 30 मार्च को नए वित्तीय वर्ष के प्रथम चार माह के लिए लेखानुदान प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र की कार्यसूची भी तय कर दी गई है।  सचिव विधानसभा मुकेश सिंघल की ओर से इस संबंध में सभी विधायकों को पत्र भेजकर सूचना भी दे दी गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार 29 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ सत्र शुरू होगा। अगले दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के बाद सरकार की ओर से नए वित्तीय वर्ष में राज्य के खर्च के लिए लेखानुदान प्रस्तुत किया जाएगा। 31 मार्च को  लेखानुदान विधेयक पारित किया जाएगा। जिसकी तैयारी हो चुकी है।

वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस के इस बार पहले की तुलना मे 8  विधायक अधिक चुनाव जीतकर आए हैं यानि भाजपा के 47 तो कांग्रेस के इस बार 19 विधायक सदन पहुंचे हैं लेकिन सवाल यहाँ ये है कांग्रेस मे इस चुनाव के हार जाने के बाद भी एकता नहीं है यानि कांग्रेस मे सर फुटौवल जारी है कहीं मुस्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर एक दूसरे पर कीचड़ उछाला जा रहा है तो कहीं चुनाव के दौरान कांग्रेस मे भीतरघात सामने आ रहा है। यहाँ तक की इसी अंतर्कलह के कारण नेतप्रतिपक्ष और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चुनने मे भी विलंब हुआ है। कांग्रेस हरीश और प्रीतम गुट मे बाँट कर रह गई है जिसका खामियाजा पार्टी को हार का मुंह देखकर उठाना पड़ा। और अभी भी अंतर्कलह कहत्म नहीं हुई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व सीएम और उत्तराखंड चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष रहे हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा है चुनाव हारने के बाद काफी समय से सोशल मीडिया में मुझ पर बिना सर-पैर के हमले करने वालों की बाढ़ सी आ गई है। धामी की धूम पेज में मुझ पर जुटकर प्रहार कर रहे भाजपाई शोहदों के साथ-साथ हमारे एक नेता से जुड़े हुए कुछ लोग भी दनादन मुझ पर गोले दाग रहे हैं, उनको लगता है हरीश रावत को गिराकर मार देने का यही मौका है। हरीश रावत ने ये भी लिखा है की मेरी ही  ही पार्टी के नेता मेरी छवि धूमिल कर रहे हैं और बेटी को पराजित करने का भी षडयंत रचा गया था। इसके अलावा भी हरीश रावत ने अपनी पोस्ट मे बहुत कुछ लिखा है ।

अब सवाल ये है जब उत्तराखंड मे कांग्रेस पार्टी ही बिखरी हुई है तो सदन मे मुट्ठीभर विधायक कैसे एकता दिखायेंगे ? सरकार से सवाल कैसे पूछेंगे ? सदन मे एकजुट कैसे होंगे क्या कांग्रेस पार्टी उत्तराखंड मे बिखर चुकी है ? क्या कांग्रेस मे अंतर्कलह कैसे खत्म होगी इन बातों का जवाब तो कांग्रेस ही दे सकती है लेकिन जनता के सामने जो छवि इस वक़्त कांग्रेस नेताओं की है उससे लगातार नुकसान पार्टी को उठाना पड़ रहा है।

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Author: nirbhiknazar

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