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“बताइये आपके 2 से ज़्यादा बच्चे क्यों है” जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से नोटिस भेजकर मांगा जवाब, टेंशन मे टीचर !

विदिषा : मध्‍य प्रदेश के विदिशा में शिक्षकों को नोटिस भेजा गया है। इसलिए नहीं कि उन्‍होंने पढ़ाने में कोताही की या इसका कोई शि‍क्षा संबंधी कारण है। उन्‍हें नोटिस तीसरे या चौथे बच्‍चे को लेकर भेजा गया है, जिसके बाद से शिक्षकों का दिमाग भी चकरा गया है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अब इसका क्‍या करें और प्रशासन को कैसे जवाब दें। ऐसे में अब वे अपनी ही संतान को लेकर तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। तीन बच्‍चे होने को लेकर प्रशासन की ओ‍र से नोटिस मिलने के बाद हर कोई कार्रवाई से डर गया है। कोई यह कह रहा है कि उन्होंने तीसरे बच्‍चे का प्लान नहीं किया था और जब यह हो गया तो वे क्‍या ही कर सकते हैं। वहीं कोई यह भी कह रहा है कि उन्‍होंने अपने तीसरे बच्‍चे को किसी को गोद दे दिया तो शिक्षक यह भी तर्क दे रहे हैं कि जब उनके नियुक्ति पत्र में ऐसा कुछ नहीं लिखा है तो नोटिस किस बात का और एक्‍शन क्‍यों?

DEO ने भेजा नोटिस

मध्‍य प्रदेश में विद‍िशा जिले के कई सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों को यह नोटिस जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की ओर से भेजा गया है, जिसमें उनसे दो से अधिक बच्‍चों को लेकर सवाल किया गया है और इसे लेकर कारण स्‍पष्‍ट करने को कहा गया है। विदिशा के DEO एके मोदगिल ने बताया, ‘हमने उन्‍हें कारण बताओ नोटिस भेजा, जिसके बाद कई ने यह तर्क दिया है कि उनके नियुक्ति-पत्र में इसका कोई जिक्र नहीं था।’

अधिकारी के मुताबिक, जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उनमें से कुछ का कहना है कि उन्‍होंने दो से अधिक बच्‍चों को लेकर कोई प्‍लान नहीं किया था और तीसरे बच्‍चे को उन्‍होंने किसी को दे दिया है। वहीं, जिन लोगों को दो से अधिक बच्‍चों को लेकर नोटिस भेजा गया है, वे अलग आहत हो रहे हैं। उनका कहना है कि इसके आधार पर कार्रवाई केवल उनके खिलाफ ही होनी चाहिए जिनके नियुक्ति पत्र में ऐसा कुछ लिखा हुआ है।

एक शिक्षक की दलील

मोहन सिंह कुशवाहा नाम के एक श‍िक्षक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, ‘हमें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हमने अधिकारियों को सूचित किया है कि हमारे नियुक्ति पत्र में ऐसे किसी नियम का कोई उल्लेख नहीं है। हम डरे हुए हैं और कुछ भी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ये हो क्‍या रहा है। कार्रवाई उन्‍हीं लोगों के खिलाफ होनी चाहिए, जिनके नियुक्ति पत्र में ऐसे किसी नियम का उल्लेख है।’

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Author: nirbhiknazar

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