नई दिल्ली: उत्तराखंड के लिए आज गौरव का दिन है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी को आज संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार को आयोजित पुरस्कार अर्पण समारोह में प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी को उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू द्वारा यह अवार्ड प्रदान किया गया। नरेंद्र सिंह नेगी को उत्तराखंड में लोक संगीत के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए वर्ष 2018 के पुरस्कार के लिए चुना गया था। उनके साथ ही देशभर की कला व साहित्य क्षेत्र की 44 अन्य हस्तियों को भी यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी व दीवान सिंह बजेली को संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार मिलने पर बधाई दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी तथा अभिनय कला के क्षेत्र में योगदान के लिये दीवान सिंह बजेली को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किये जाने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक लोक गीत के क्षेत्र में नरेन्द्र सिंह नेगी तथा अदाकारी के क्षेत्र में दीवान सिंह बजेली को दिया गया सम्मान प्रदेश का भी सम्मान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के लोक गीत संगीत एवं अभिनय कला को भी पहचान मिली है।
ज्ञातव्य है कि लोक गायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी को पारंपरिक लोक गीत व संगीत के क्षेत्र में तथा दीवान सिंह बजेली को अभिनय कला में योगदान/छात्रवृति के क्षेत्र में यह पुरस्कार दिया गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी पौड़ी गढ़वाल तथा दीवान सिंह बजेली सोमेश्वर अल्मोड़ा के मूल निवासी है।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत में कला वर्ग में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार है। इस समारोह में लोककला, संगीत, साहित्य, नाटक एवं विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय कार्य करने वाली देशभर की 44 प्रतिभाओं को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार स्वरुप ताम्र पत्र, अंग वस्त्र और 1 लाख रुपए की धनराशि दी गई। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के विदेश दौरे के चलते उपराष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार वितरित किए।

नेगी दा के नाम से विख्यात नरेंद्र सिंह नेगी पहाडी लोक संगीत में एक अलग पहचान रखते है। निसंदेह नेगी दा उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। वे कवि हैं, गीतकार हैं, लोकगायक हैं, और साथ ही चिंतक भी है। वे उत्तराखण्ड के एकमात्र लोक गायक हैं जो अस्कोट से आराकोट तथा हरिद्वार से बदरीनाथ तक समान रूप से लोकसमाज में प्रतिष्ठापित हैं।
नेगी जी का जन्म 12 अगस्त 1949 में पौड़ी जिले के पौड़ी गांव में हुआ। उन्होंने गायन-वादन विधा की शुरुआत पौड़ी की रामलीला से की थी और अब तक वे दुनियाभर के कई देशों मे पहाड़ी संगीत की प्रस्तुति दे चुके हैं। नेगी जी की रचनाएं क्वालिटी की गारंटी होती हैं, इसीलिए लोग उन्हें गौर से न सिर्फ सुनते हैं बल्कि एक नजीर मान कर चलते हैं।
ऐसा नहीं है कि नेगी जी केवल उत्तराखण्ड में रह रहे लोगों के बीच ही प्रसिद्ध हैं बल्कि वे देश के विभिन्न भागों में रह रहे अपने लोगों के साथ ही सात समंदर पार भी अपनी माटी की खुश्बू बिखरने के सिद्धहस्त कलाकार हैं। इसी कारण उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।