देहरादून: उत्तराखंड मे कांग्रेस की हालत कुछ अच्छी नज़र नहीं आ रही है बगावत और अंतर्कलह ने कांग्रेस की कलाई खोलकर रख दी है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उत्तराखंड मे बहुमत मिलने का दावा कर रही थी लेकिन कांग्रेस का ये दावा हवा हवाई साबित हुआ यहाँ तक की कांग्रेसी दिग्गज हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी अपनी सीट नहीं बचा पाएँ, और उत्तराखंड मे सरकार बनाने वाली कांग्रेस को 70 मे से सिर्फ 19 पर संतोष करना पड़ा और बीजेपी बहुमत के साथ 47 सीटों पर जीती। कांग्रेस के हार के बाद प्रदेश प्रभारी से लेकर कई दिग्गजों पर भीतरघात के आरोप लगे यानि कांग्रेस ने पाया की कांग्रेस कई सीटोन पर भीतरघात की वजह से हारी जिसको लेकर हार की समीक्षा भी की गई लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ न किसी पर कोई कार्रवाई हुई और न ही किसी के ऊपर जांच बैठाई गई। और कांग्रेस पार्टी शांत होकर बैठ गई।

ये तो थी चुनाव तक की बात अब जो मामला है वो कांग्रेस मे मौजूद अंतर्कलह और बड़े नेताओं की अनदेखी का पूरा सच उजागर कर रहा है आपको बता दें उत्तराखंड में करन सिंह माहरा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बनाने के बाद से ही पार्टी में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। विधानसभा चुनावों में हार का ठीकरा गुटबाजी और राज्य के नेताओं पर फोड़ने की बात के आधार पर संगठन में बदलाव की बात प्रदेश के नेताओं के गले नहीं उतर रही है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस के करीब 10 विधायक पार्टी छोड़ने के मूड मे हैं जिसमे धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी तो खुलकर बगावत कर रहे हैं उनका कहना है की उत्तराखंड मे कांग्रेस की हार देवेन्द्र यादव की वजह से हुई है। वहीं सूत्रों के मुताबिक ये भी खबर है की कांग्रेस से नाराज़ विधायक अपनी अलग पार्टी बनाने के मूड मे हैं।
अब सवाल ये उठता है की कांग्रेस की इस हार का जिम्मेदार कौन है किसकी वजह से कांग्रेस उत्तराखंड मे हारी प्रदेश प्रभारी की वजह से या प्रदेश के नेताओं मे अंतर्कलह हार की वजह बनी, अब कांग्रेस ने पुराने चेहरों को और गढ़वाल को छोड़कर जो प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस को दिये हैं उनसे कांग्रेस के ज़्यादातर लोग नाराज़ दिख रहे हैं जिसका सबूत कांग्रेस के विधायकों की नाराजगी है इसका जिम्मेदार कौन है? हार से बढ़ी रार कांग्रेस मे बनाए गए नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष तक पहुँच गई है सवाल ये है की ये रार खत्म कैसे होगी और कैसे उत्तराखंड मे कांग्रेस मजबूत बनेगी ? वहीं नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है की अगर 100 मे से 4 उनको मिली जिम्मेदारी से नाराज है तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वहीं कांग्रेस का कहना है की कांग्रेस मे कोई अंतर्कलह नहीं है और मनमुटाव को कांग्रेस दूर कर रही है। वहीं जानकारों का कहना है की कांग्रेस को एक समझदार अध्यक्ष की जरूरत है जो नेताओं को एकजुट करके रख सके। वही बीजेपी भी कांग्रे के इन घटना क्रम पर जमकर हमलावर है।