देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने पदभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। आपको बता दें उत्तराखंड मे हुए विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था और चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस को 70 मे से सिर्फ 19 सीटें मिलीं थी इससे पहले गणेश गोदियाल प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल रहे थे और उन्होने सार्वजनिक तौर पर हार की ज़िम्मेदारी भी ली थी। अब उत्तराखंड कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष दिया गया है और नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस मे काफी नाराजगी भी देखि गई। अब कार्यभार संभालने के बाद ये देखने वाली बात होगी की नवनियुक्त कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कैसे पार्टी को आगे लेकर चलते हैं और पार्टी मे नाराज़ नेताओं की नाराजगी कैसे दूर करते हैं कांग्रेस के सामने इस वक़्त उपचुनाव की भी चुनौती है और हरीश रावत के मुताबिक कांग्रेस इसे जीत का एक अवसर समझ रही है और हरदा के मुताबिक कांग्रेस सीएम धामी के खिलाफ एक मजबूत प्रत्याशी उतरकर उसे जिताएगी । अब देखने वाली बात होगी की करन माहरा के नेत्रत्व मे कैसे कांग्रेस की नैया पार होती है। और कैसे कांग्रेस मे जारी अंतर्कलह शांत होगी।

एक तरफ जहां कांग्रेस मे नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी हो चुकी है वहीं दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में भितरघात करने वालों पर गाज गिराने की पटकथा भी लिखी जा चुकी है आपको बता दें भाजपा ने 23 विधानसभा सीटों पर पार्टी विरोध कार्य करने की रिपोर्ट अनुशासन समिति को सौंप दी है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अनुशासन समिति की सिफारिशों पर पार्टी भितरघात करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी। भाजपा मुख्यालय में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की अध्यक्षता में अनुशासन समिति की बैठक हुई। जिसमें प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 23 सीटों पर मिली शिकायतों की रिपोर्ट अनुशासन समिति को सौंपी है। बैठक के बाद प्रदेश प्रभारी ने कहा कि चुनाव लेकर विधानसभा क्षेत्रों से कुछ शिकायतें आ रही थी। जिस पर पार्टी की ओर से वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को विधानसभा क्षेत्रों में भेजा गया है। जो पार्टी विरोध काम करने और अन्य शिकायतों की रिपोर्ट लेकर आए हैं। उन्होंने माना कि कई विधानसभा क्षेत्रों में अनुशासनहीनता हुई है। रिपोर्ट सत्यापन के लिए अनुशासन समिति को सौंप दी है। सप्ताह या 10 दिन में अनुशासन समिति अपनी रिपोर्ट देगी। जिसके बाद संगठनात्मक रूप से बैठक चर्चा कर कार्रवाई की जाएगी।